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Saturday, May 22, 2021

Banjara Janjati Ka Samanya Parichay (बंजारा जनजाति का सामान्य परिचय)

Banjara Janjati Ka Samanya Parichay 

➧ बंजारा झारखंड के घुमक्कड़ किस्म की अल्पसंख्यक जनजाति है जो छोटे-छोटे गिरोहों में घूमती रहती है इनका कोई गांव नहीं होता है 

➧ इसकी आबादी अब मात्र -487 है, जो राज्य की जनजातीय आबादी का 0.01% है 

बंजारा जनजाति का सामान्य परिचय

➧ 1956 ईस्वी में इन्हें जनजाति का दर्जा प्रदान किया गया था 

➧ इस जनजाति का सबसे अधिक सकेंद्रण संथाल परगना क्षेत्र में है 

➧ यह जनजाति अपनी भाषा को लंबाडी कहते हैं 

➧ समाज एवं संस्कृति 

➧ इस जनजाति का समाज पितृसत्तात्मक होता है

 इनका परिवार नाभिकीय होता है जिसमें माता-पिता और अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं 

➧ यह जनजाति चौहान, पावर, राठौर तथा उर्वा नामक चार वर्गों में विभाजित है

 इस जनजाति में राय की उपाधि काफी प्रचलित है

 इस जनजाति में विधवा विवाह को नियोग कहा जाता है 

 इस जनजाति में वधू मूल्य को हारजी कहा जाता है

 इस जनजाति में विवाह पूर्व सगाई की रस्म प्रचलित है 

➧ इस जनजाति के लोग मुख्य रूप से होली, दशहरा, दीपावली, जन्माष्टमी, नाग पंचमी, रामनवमी आदि पर्व मनाते हैं 

➧ इस जनजाति में 'आल्हा -उदल' की लोककथा काफी प्रचलित है तथा ये तथा यह 'आल्हा -उदल' को वीर पुरुष मानते हैं 

➧ इस जनजाति के गीतों में पृथ्वीराज चौहान का उल्लेख मिलता है 

➧ इस जनजाति का लोक नृत्य 'दंड-खेलना' अत्यंत प्रचलित है 

➧ आर्थिक व्यवस्था 

➧ पेशेगत दृष्टि से इन्हें तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है, जिसमें गुलगुलिया (भिक्षुक वर्ग ) एवं कंजर (अपराधिक वर्ग) प्रमुख हैं 

➧ यह जनजाति जड़ी-बूटी के अच्छे जानकार होते हैं 

➧ इस जनजाति के लोग संगीत प्रेमी होते हैं तथा संगीत से जुड़ा हुआ पेशा भी अपनाते हैं 

➧ धार्मिक व्यवस्था 

➧ इनकी प्रमुख देवी बंजारी देवी है

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