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Monday, May 24, 2021

Chero Janjati Ka Samanya Parichay (चेरो जनजाति का सामान्य परिचय)

Chero Janjati Ka Samanya Parichay

➧ प्रजातीय दृष्टि से इस जनजाति का संबंध प्रोटो-आस्ट्रोलॉयड समूह से है

➧ इनका झारखंड में सबसे अधिक संकेन्द्रण पलामू और लातेहार जिले में है 

➧ यह जनजाति स्वयं को  च्वयन ऋषि का वंशज मानती है

चेरो जनजाति का सामान्य परिचय

➧ यह जनजाति स्वयं को चौहान या राजपूत कहती हैं

➧ यह झारखंड की एकमात्र जनजाति है जो जंगलों और पहाड़ों में रहना नहीं पसंद करती हैं

➧ इनकी बोलचाल की भाषा सदानी है 

 समाज एवं संस्कृति 

➧ इनका समाज पितृसत्तात्मक और पितृवंशीय होता है

➧ यह जनजाति दो उपसमूहों बारह हजारी/बारह हजारिया और 13 हाजिरी और वीरबंधिया में विभक्त है 

➧ बारह हजारी स्वयं को श्रेष्ठ मानते हैं

 यह जनजाति 7 गोत्रों (पारी) में विभाजित है इनके प्रमुख गोत्र (पारी) छोटा मुउआर, बड़ा मुउआर, छोटा कुंवर,  बड़ा कुंवर, सोनहैत आदि है

➧ इस जनजाति में विवाह के दो प्रकार ढोला विवाह (लड़के के घर लड़की लाकर विवाह) व चढ़ा विवाह (लड़की के घर बरात ले जाकर विवाह) है 

➧ ढोला विवाह सामान्यता गरीबों के यहां देखा जाता है

➧ इस जनजाति में वधू मूल्य को दस्तूरी कहा जाता है 

➧ चेरों  लोग गांव को डीह कहते हैं 

➧ इस जनजाति का प्रमुख त्योहार सोहराय, काली पूजा, छठ पूजा, होली आदि है

 आर्थिक व्यवस्था 

➧ इनका प्रमुख पेशा कृषि कार्य है

 धार्मिक व्यवस्था 

➧ इस जनजाति के धार्मिक प्रधान को वैगा कहा जाता है 

➧ इस जनजाति में जादू टोना करने वाले व्यक्ति को माटी कहा जाता है

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