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Tuesday, January 19, 2021

Jharkhand Ki Vit Vyavastha(झारखंड की वित्त व्यवस्था)


झारखंड की वित्त व्यवस्था

(Jharkhand Ki Vit Vyavastha)



भारत जैसे विकासशील राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में 

विकास के दो चरण होते हैं:-

1) सर्वजनिक क्षेत्र एवं 

2) निजी क्षेत्र 

➤ये दोनों क्षेत्र मिलाकर ही अर्थव्यवस्था को प्रगति प्रदान करते हैं

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत  ने आर्थिक नियोजन को अपनाया 

इसका अर्थ यह था कि राज्य उत्पादन वितरण तथा उपभोक्ता के स्तर तथा तरीकों को निर्धारण करने में सक्रिय भूमिका निभाते हुए निजी संपत्ति तथा बाजार की संस्थाओं की कद्र भी करेगा

हमारे संविधान ने बाजार को अपना कार्य करने की स्वतंत्रता दी है लेकिन साथ ही इसने राज्य को  बाजार की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप करने का अधिकार भी दिया है 

1991 में नरसिम्हा राव की सरकार ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का कार्य किया जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थितियां भारत के लिए अनुकूल होती गई  

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था तथा संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही झारखंड की वित्त व्यवस्था भी संचालित होती है

जट प्रक्रिया 

भारतीय संविधान की धारा 202 के अंतर्गत राज्य सरकारों  द्वारा वित्तीय ब्यौरा प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है, जिसे वार्षिक वित्तीय वितरण भी कहा जाता है इसे सामान्यतः बजट कहा जाता है

बजट पेश किया जाना 

आगामी वित्तीय वर्ष के लिए राज्य की सभी प्राप्तियों  और विवरणों को सामान्य चर्चा के लिए विधान सभा के समक्ष राज्यपाल के निर्देश पर राज्य के वित्तमंत्री विधान सभा में बजट प्रस्तुत करते हैंइससे बजट 'प्रस्तुतीकरण' कहा जाता है


बजट भाषण समाप्त होने के बाद विधानसभा की बैठक अगले दिन के लिए स्थगित हो जाती है। प्राय: उस दिन आगे कोई कामकाज नहीं होता है

बजट प्रस्तुत करने के दिन बजट पर कोई चर्चा नहीं होती है 

बजट का वितरण 

वित्तमंत्री के भाषण के बाद बजट विधानसभा सचिवालय द्वारा सदस्यों को तथा पत्रकार दीर्घा में प्रवेश पाने वाले पत्रकारों में वितरित कर दिया जाता है 

बजट पर चर्चा 


उस दिन बजट पर कोई चर्चा नहीं होती है, जिस दिन बजट विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है

बजट पर दो प्रक्रमों में चर्चा की जाती है पहले संपूर्ण बजट पर सामान्य चर्चा होती हैसामान्यत: चर्चा अध्यक्ष द्वारा निर्धारित 3 से 4 दिनों तक चलती है

इसमें बजट की मुख्य-मुख्य बातों, इसके सिद्धांतों तथा नीतियों पर चर्चा होती है

सामान्य चर्चा के बाद अनुदानों  की मांगों पर चर्चा तथा मतदान का सिलसिला शुरू होता है

चर्चा के लिए समय तय करना 

बजट पर सामान्य  चर्चा, अनुदान-मांगों पर मतदान, विनियोग विधेयक एवं वित्त विधेयक को पास करने की समस्त प्रक्रिया को निश्चित समय में पूरा किया जाना होता है

➤मांगों पर मतदान के लिए निर्धारित पूरे समय का विभाजन विभिन्न मांगों के लिए अथवा विभिन्न मंत्रियों की मांगों के लिए अलग-अलग से किया जाता है

बजट पर सामान्य चर्चा

बजट पर सामान्य चर्चा के दौरान विधानसभा संपूर्ण बजट पर या उसमें निहित सिद्धांतों के किसी प्रश्न पर चर्चा करने के लिए स्वतंत्र होती है, किंतु इस मौके पर कोई अन्य प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया जा सकता और ना ही बजट मतदान के लिए रखा जा सकता है

चर्चा का विस्तार सामान्य योजनाओं और बजट के ढांचे का परीक्षण, कर लगाने की नीति तक सीमित होनी चाहिए 

वित्त मंत्री को बहस के अंत में उत्तर देने का अधिकार होता है

अनुदान मांगों पर चर्चा एवं मतदान

अनुदान की मांगों पर मतदान के लिए अध्यक्ष द्वारा निर्धारित समय के दौरान चर्चा का विस्तार उस विषय तक सीमित होना चाहिए, जो प्रभारी मंत्री के प्रशासकीय नियंत्रण में हो

याह सदस्यों के ऊपर निर्भर करता है कि वह किसी विशेष विभाग द्वारा अनुसरण की जाने वाली नीति का अनुमोदन करें या विभागीय प्रशासन में मितव्ययिता के उपाय बताएं या विभाग का ध्यान विशेष स्थानीय शिकायतों की ओर केंद्रित करें

➤इस प्रक्रम पर किसी नुदान की मांग को कम करने हेतु कटौती प्रस्ताव पेश किये जा सकता है, किंतु किसी मांगों में कमी चाहने वाले प्रस्ताव में संशोधन स्वीकार योग्य नहीं होते
 

कटौती प्रस्ताव

अनुदान की मांग को कम करने के लिए लाए जाने वाले प्रस्ताव को कटौती प्रस्ताव कहा जाता है

कटौती प्रस्तावों उद्देश्य उसमें निहित विषय की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करना होता है

कटौती प्रस्तावों की सूचना मांगों पर मतदान के लिए नियत प्रथम दिन से सामान्यत: 4 दिन पूर्व निर्धारित समय से पहले विधानसभा सचिवालय में दी जानी चाहिए

लेखानुदान

बजट के पारित होने तक सरकारी खर्चों की वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए विधानसभा को लेखानुदान के रूप में अनुदानों  की स्वीकृति का अधिकार है

लेखानुदान अनुदान के रूप में जो राशि स्वीकृत कराई जाती है, वह उस वित्तीय वर्ष के एक भाग के खर्चे की पूर्ति के लिए आवश्यक होती है

संबंधित वित्तीय वर्ष के अनुमानित व्यय के लिए सामान्यत: लेखानुदान 3 या 4 माह के लिए भी पास किया जा सकता है

अनुपूरक /अतिरिक्त अनुदानों  पर चर्चा व्याप्ति 

संपूर्ण अनुदान को कम करने के लिए जिन मदों से मिलकर अनुदान बना हो, उनको कम करने या निकाल देने के लिए संशोधन के रूप में कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा सकते हैं 

अनुपूरक मांगों पर चर्चा के समय बहस मात्र शामिल की गई मदों के संबंध में ही सीमित रहती है इस अवसर पर मूल मांगो और नीतिगत विषयों पर सामान्य चर्चा संभव नहीं होती

मुख्य बजट में सम्मिलित योजनाओं के बारे में अन्तर्निहित  सिद्धांतों के विषय में चर्चा नहीं उठाई जाती। इस मौके पर सदस्य अनुपूरक मांगों की आवश्यकता के बारे में इंगित कर सकते हैं 

सांकेतिक अनुदान 

जब किसी नई सेवा पर प्रस्तावित व्यय के लिए पुनर्विनियोग द्वारा धन उपलब्ध कराना हो तो सांकेतिक राशि के अनुदान  की  मांग विधानसभा में मतदान के लिए रखी जा सकती है  

विनियोग विधेयक 

राज्य की संचित निधि में से कोई भी राशि तब तक नहीं निकाली जा सकती,  जब तक कि उसके संबंध में विनियोग विधेयक पारित नहीं कर लिया जाता

विधानसभा द्वारा अनुदान की मांगों को पारित करने के तुरंत बाद सभी धनराशियों  को राज्य की संचित निधि से विनियोग किए जाने की व्यवस्था के लिए विनियोग विधेयक पुन:स्थापित किया जाता है

विधानसभा में विनियोग विधेयक के पुन:स्थापित होने के बाद अध्यक्ष विधेयक के प्रक्रम को पूरा करने के लिए विनिश्चित करता है

विनियोग विधेयक पर वाद-विवाद उन अनुदानों  में निहित लोक महत्व के विषयों या प्रशासकीय नीति तक सीमित रहता है, जो उस समय ना उठाए गए हों और जो अनुदानों  की मांगों पर विचार करते समय पहले उठायें  न जा चुके हों

वाद-विवाद की पुनरावृति रोकने के लिए अध्यक्ष चाहे तो विनियोग विधेयक पर चर्चा में भाग लेने के लिए इच्छुक सदस्यों से कह सकता है कि वह पहले उन विशिष्ट विषयों की सूची सूचना दें, जिन्हें वे उठाना चाहते हैं

अध्यक्ष वैसे विषयों को उठाए जाने की अनुमति देने से इंकार कर सकता है, जो उनके विचार में पुनरावृत्ति हों, जो अनुदानों  की मांग पर चर्चा के समय उठायी जा चुकी हों  या जो समुचित लोक महत्व की न हों
 

अध्यक्ष की शक्तियां

नियमों के अधीन अध्यक्ष द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियों  के अतिरिक्त अध्यक्ष उन सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है, जो समस्त कार्य को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक हों

राज्यों के राजस्व स्त्रोत

1) प्रति व्यक्ति कर 
2) कृषि-भूमि, उत्तराधिकारी संबंधी शुल्क
3) राज्यों  में उत्पादित या निर्मित शराब, अफीम आदि मादक द्रव्यों पर उत्पादन कर
4) कृषि भूमि पर संपदा शुल्क
5) न्यायालयों द्वारा लिए जाने वाले मूल्य को छोड़कर राज्य सूची में सम्मिलित विषयों पर मूल्य
6) भू राजस्व
7) संघ सूची में वर्णित लेखों को छोड़कर अन्य लेखों पर मुद्रांक मूल्य 
8) कृषि आय पर कर 
9) भूमि और भवनों पर कर 
10) खनिज पदार्थों के विकास के लिए निश्चित सीमा के अधीन खनन अधिकारों पर कर 
11) बिजली के उपभोग तथा विक्रय पर कर 
12) स्थानीय क्षेत्र में उपभोग, प्रयोग तथा विक्रय के लिए लायी गयी वस्तुओं पर कर 
13) समाचार-पत्रों को छोड़कर अन्य वस्तुओं के क्रय तथा विक्रय  मूल्य पर कर 
14) समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों को छोड़कर अन्य विज्ञापनों पर कर 
15) सड़कों तथा अंतर्देशीय जलमार्गों  से ले जाया जाने वाला माल तथा यात्रियों पर कर 
16) वाहनों पर कर 
17) पशुओं तथा नौकाओं पर कर 
18) व्यवसायों, आजीविकाओं  गांव तथा नौकरियों पर कर
19) विलासिता की वस्तुओं पर कर इनमें मनोरंजन तथा जुआ भी शामिल है
20) चुंगी करपर कर 
14) समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों को छोड़कर अन्य विज्ञापनों पर कर 
15) सड़कों तथा अंतर्देशीय जलमार्गों  से ले जाया जाने वाला माल तथा यात्रियों पर कर 
16) वाहनों पर कर 
17) पशुओं तथा नौकाओं पर कर 
18) व्यवसायों, आजीविकाओं  गांव तथा नौकरियों पर कर
19) विलासिता की वस्तुओं पर कर इनमें मनोरंजन तथा जुआ भी शामिल है
20) चुंगी कर
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Thursday, January 14, 2021

Jharkhand Me Sanchar Vyavastha (झारखंड में संचार व्यवस्था)

Jharkhand Me Sanchar Vyavastha

(झारखंड में संचार व्यवस्था)

झारखंड में संचार के मुख्य साधन:- डाक तार, रेडियो,  दूरभाष, दूरदर्शन तथा समाचार पत्र-पत्रिकाएं हैं 

राज्य में आकाशवाणी के पास केंद्र है :- रांची, हजारीबाग, जमशेदपुर, मेदिनीनगर व चाईबासा

इसके मुख्य केंद्र - रांची और जमशेदपुर में है

झारखंड में अभी ऑल इंडिया रेलवे स्टेशन के 13 केंद्र हैं। इसके मुख्य केंद्र - रांची एवं जमशेदपुर में  अन्य आकाशवाणी के स्थानीय रेडियो स्टेशन (एल आर सी) है :-  हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, मेदनीनगर ,चाईबासा, चतरा ,देवघर,गढ़वा, घाटशिला, गुमला

राज्य में दूरदर्शन का प्रथम केंद्र 1974 (छठी पंचवर्षीय योजना) रांची में स्थापित किया गया

वर्तमान में मेदनीनगर (डालटेनगंज) तथा जमशेदपुर में भी दूरदर्शन केंद्र कार्यरत हैं। 

राज्य में केवल 26 पॉइंट 8% (जनगणना 2011) घरों में टीवी है यह अखिल भारतीय औसत (47. 2%) से बहुत कम है

झारखंड में टीवी कवरेज पूरे भारत के औसत कवरेज का आधा है

राज्य में इंटरनेट का प्रचलन भी बहुत कम है। यहां प्रति एक लाख आबादी पर इंटरनेट कनेक्शनो की संख्या 151 है, जो कि राष्ट्रीय औसत 1919 से काफी कम है

राज्य में आधुनिक पत्रकारिता का आरंभ जी0 एल0 चर्च, रांची के द्वारा 1 दिसंबर 1872 से 'घर-बंधु' नामक पत्रिका प्रकाशित होने के साथ हुआ

झारखंड का पहला दैनिक 'राष्ट्रीय भाषा' 1950 से प्रकाशित होना शुरू हुआ

15 अगस्त 1963  से सप्ताहिक रांची एक्सप्रेस का प्रकाशन आरंभ हुआ

वर्तमान झारखंड में कई पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित हो रहे हैं

झारखंड में कुल डाकघरों की संख्या 3094 है, जो प्रति एक लाख लोगों पर डाकघरों की संख्या 1 पॉइंट 06  है, जबकि भारत में यह संख्या 1.50 है

आधारभूत संरचना के क्षेत्र में संचार सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है

राज्य प्रशासन ने संचार व्यवस्था के महत्व को देखते हुए इसे सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए हैं

झारनेट:-

झारनेट :- सरकार द्वारा 'झारखंड स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क' (Jharkhand State Wide Area Network) की स्थापना 2005-06 में की गई 

वर्तमान में झारनेट से सभी जिला मुख्यालयों, 45 अनुमंडल एवं 264 प्रखंडों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है 

ई-ऑफिस:-

➤ई-ऑफिस:-  झारखंड सरकार ऑफिस को पेपरलेस  करने के उद्देश्य से ई-ऑफिस web-application झारखंड के सरकारी विभागों में कार्यों के अनुरूप कस्टमाइज तथा विकसित किया गया है 

इस परियोजना हेतु सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग नोडल विभाग है तथा जैप -आई टी क्रियान्वयन अभिकर्त्ता (Implementing Agency) है 

जैप -आई टी का गठन 29 मार्च 2004 को किया गया है 

ई-मुलाकात :- 

ई-मुलाकात :- यातायात के  लागत, ईंधन, व्यय  शुल्क इत्यादि में व्यय  को कम करने के लिए ई-मुलाकात की प्रणाली विकसित की गई है

इसमें वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई की जाती है

ई-प्रोक्योरमेंट :- 

ई-प्रोक्योरमेंट:- राज्य में विभिन्न प्रकार की निविदाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने  के लिए पांच लाख और इससे ऊपर की  निविदाओं के लिए वर्तमान में 39 विभागों द्वारा प्रोक्योरमेंट की व्यवस्था अपनाई गई है

झारखण्ड स्टेट डाटा सेंटर:-

इसका निर्माण त्रिस्तरीय संरचनात्मक और क्लाउड आधारित है 

राज्य में स्टेट डाटा सेंटर 1 अगस्त 2016  से कार्यरत है मेसर्स ऑरेंज को सौंपा गया है  

इसके संचालन की देख-रेख एन.आई.सी. द्वारा गठित दल द्वारा की जाती है, जबकि ऑडिट का कार्य डेलोंइट द्वारा किया जाता है 

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया(STPI):-

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया:- झारखंड राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में  सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री को उत्कृष्ट स्तर की आधारभूत संरचना प्रदान करने के लिए इस पार्क की स्थापना की जा रही है

इसके उद्देश्यों को पूरा करने हेतु जमशेदपुर एवं सिंदरी में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ़ इंडिया का निर्माण कार्य शुरू हो गया है

इस कार्य के लिए 'जफ्रा' को परामर्शी (Consultant) के रूप में नियुक्त किया गया है

एम्.एस.डी.जी.

एम्.एस.डी.जी.:- राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार की सहायता से इस परियोजना की शुरुआत की गई है। 

इसमें आम नागरिकों की सुविधा के लिए दस्तावेजों को अपलोड किया गया है तथा आठ प्रकार के ई-फॉर्म्स  को शामिल किया गया है

कॉमन सर्विस सेंटर

कॉमन सर्विस सेंटर :- राज्य में 4460 ग्रामीण क्षेत्र एवं 233 शहरी क्षेत्र में कॉमन सर्विस सेंटर की स्थापना की गई है 

राज्य की 4562 ग्राम पंचायतों में एक-एक प्रज्ञा केंद्र स्थापित एवं संचालित किए जा रहे हैं 

पेमेंट गेटवे

पेमेंट गेटवे :- झारखंड सरकार द्वारा नागरिकों को सुगम, संवेदनशील, पारदर्शी और कठिनाई रहित सेवा उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था वर्ष 2013 से की गई है

इसका मुख्य उद्देश्य है कि नागरिक अपना कर, शुल्क अथवा सेवाओं के लिए उपेक्षित भुगतान भी घर बैठे या निकटतम प्रज्ञा केंद्रों इत्यादि के माध्यम से कर पाएं

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Wednesday, January 13, 2021

Jharkhand Ki Parivahan Vyavastha(झारखंड की परिवहन व्यवस्था)

Jharkhand Ki Parivahan Vyavastha


झारखंड की परिवहन व्यवस्था

➤किसी भी राज्य की आर्थिक जीवन में परिवहन के साधनों का काफी महत्व होता है
 

परिवहन के साधन राज्य की आर्थिक प्रगति तथा विकास के प्रतीक होते हैं

परिवहन के साधनों का महत्व न केवल उत्पादन के समुचित प्रादेशिक वितरण एवं क्षेत्रीय उत्पादनों  के लिए बाजार की सुविधा के संदर्भ में है, परंतु यह उत्तम प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी अनिवार्य है

परिवहन के साधन

1) सड़क परिवहन 

2) रेल परिवहन 

3) वायु परिवहन 

1) सड़क परिवहन

सड़क परिवहन :- यह झारखंड में परिवहन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधन है 

झारखंड में कुल सड़क मार्ग की लंबाई 26,277 किलोमीटर है 

झारखंड राज्य में सड़क का घनत्व (सड़क किलोमीटर /1000 वर्ग किलोमीटर) 122 पॉइंट 33 है, जो राष्ट्रीय घनत्व 182 पॉइंट 40 से कम है 

झारखंड की सड़कों को निम्नलिखित चार भागों में विभाजित किया जा सकता है :-

I) राष्ट्रीय राजमार्ग 
II) राजकीय राजमार्ग
III) लोक निर्माण विभाग की सड़कें 
IV) ग्रामीण सड़कें 

I) राष्ट्रीय राजमार्ग:-

राष्ट्रीय राजमार्ग :- ऐसे प्रमुख मार्ग जो 1 से अधिक राज्यों को मिलाते हुए गुजरते हैं, राष्ट्रीय राजमार्ग कहलाते हैं 

राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 2678 पॉइंट 83 किलोमीटर है

राज्य से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल संख्या 23 है 

राज्य से गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग हैं :- राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 2, 6, 23, 31, 32, 33, 43, 75, 78,  80, 98, 99,100, 103B, 114A, 133A, 143A, 220, 333, 333A, 343 और 419  

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 32 और 33 राज्य के सर्वाधिक महत्वपूर्ण राजमार्ग हैं 

ये  बिहार और अन्य राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ते हैं 

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 33 झारखंड का सबसे लंबा (333 पॉइंट 5 किलोमीटर) राष्ट्रीय राजमार्ग है 

भारत के प्रमुख एक्सप्रेस मार्गो में से एक ग्राण्ड ट्रंक रोड (राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या -2 ) झारखंड से होकर गुजरता है 

II) राजकीय राजमार्ग:-

राजकीय राजमार्ग :- इस श्रेणी में वैसे प्रमुख सड़कें आती हैं ,जो राज्य की राजधानी को जिला मुख्यालय से जोड़ते हैं

झारखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 1777 पॉइंट 2 किलोमीटर है 

राजकीय राजमार्ग की देख-रेख, मरम्मत और निर्माण की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है  

यह सरकार के पी0 डब्ल्यू0 डी0  विभाग के जिम्मे है  

III) लोक निर्माण विभाग की सड़कें :-

लोक निर्माण विभाग की सड़कें:-  झारखंड में 5880 पॉइंट 89  किलोमीटर सड़कें लोक निर्माण विभाग की है। यह विभाग इसका निर्माण और रख-रखाव करता है

IV) ग्रामीण सड़कें

ग्रामीण सड़क :- ये प्रायः कच्ची सड़कें होती हैं, जिनका निर्माण स्थानीय पंचायत के सहयोग से किया जाता है

इनकी व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य के ग्रामीण अभियंत्रण संगठन की है। 

झारखंड के मात्र 50% गांव पक्की सड़कों से जुड़े हैं

2) रेल परिवहन:-

रेल परिवहन:- ईस्ट इंडिया रेल कंपनी द्वारा कोलकाता से राजमहल तक बनाए गए प्रथम रेल मार्ग के साथ ही झारखंड में सन 1860 -62 से रेल परिवहन का विकास शुरू हुआ था 

राज्य में प्रारंभिक रेल मार्गों का विकास उन्हीं क्षेत्रों में किया गया था, जहां कोयला, लोहा, आदि खनिजों को ढ़ोने  की आवश्यकता थी

राज्य में रेल मार्ग की कुल लंबाई 1,943 किलोमीटर है

राज्य में कुल 252 रेलवे स्टेशन हैं,जिनमे 97 बड़े स्टेशन हैं। 

धनबाद रेलवे स्टेशन राज्य का सबसे बड़ा स्टेशन है,जहां से सबसे अधिक राजस्व की प्राप्ति होती है

राज्य के कई जिले अभी भी रेल सुविधा से वंचित है

वर्तमान में झारखंड में दो रेलवे परिक्षेत्र है:- पूर्वी-रेलवे एवं दक्षिण-पूर्व रेलवे

राज्य में छ: नए रेलवे परियोजना का काम प्रगति पर है। जिसकी कुल लंबाई 565 किलोमीटर है

3) वायु परिवहन:- 

वायु परिवहन झारखंड में सबसे पहले हवाई अड्डे का निर्माण 1941 ईस्वी में हुआ था।                     

रांची स्थित हवाई अड्डे का नाम बिरसा मुंडा हवाई अड्डा है

रांची से नियमित वायु सेवा मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता,अहमदाबाद, भुवनेश्वर, हैदराबाद, जयपुर और पटना के लिए उपलब्ध है

राज्य में एयर इंडिया, इंडिगो, गो एयर, जेट एयरवेज, विस्तारा तथा एयर एशिया की एयर लाइनस  सुविधाएं बिरसा मुंडा हवाई अड्डा से उपलब्ध है

राज्य में रांची के अतिरिक्त जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो ,हजारीबाग, मोदीनगर, नोवामुंडी , चाकुलिया, गिरिडीह, देवघर, मैथन , दुमका आदि जगहों में हवाई पट्टियां बनाई गई हैं 

इन हवाओं की घेराबंदी,रनवे को बेहतर बनाने तथा टर्मिनल भवन स्थापित करने हेतु सरकार कदम उठाए जा रहे हैं 

➤अन्तर्राज्यीय नियमित उड़ान हेतु जमशेदपुर से 50 किलोमीटर की दूरी पर धालभूमगढ़ में हवाई पट्टी का निर्माण कराए जाने का कार्य प्रगति पर है 

राज्य में अभी भी प्रतिदिन विमान से यात्रा करने वाले यात्रियों की औसत संख्या बहुत कम है

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