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Tuesday, August 31, 2021

Chotanagpur Kashtkari Adhiniyam 1908 Part-5 (छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908)

Chotanagpur Kashtkari Adhiniyam 1908 Part-5

अध्याय 10 :- भू-स्वामी तथाा काश्तकार केे लिए प्रकीर्ण उपबंध (कोड़कर) (धारा- 64 से 75)

➧ धारा - 64 :- उपायुक्त के आदेश से भूमि के कोड़कर में परिवर्तन

➧ किसी गांव के कृषक या भूमिहीन श्रमिक उपायुक्त की पूर्व अनुमति लेकर सामान्य भूमि को कोड़कर भूमि में बदल सकते हैं
 सामान्यत परती या टांड़ भूमि को रैयत कोड़कर समतल बनाते हैं तथा इस पर धान की खेती करते हैं इस प्रकार से तैयार किया गया खेत शुरू में लगान मुक्त होता है , परंतुु बाद में इस पर उपयुक्त लगान का निर्धारण  कियाा जाता है , लेकिन यह सामान्य लगान दर से हमेशा कम होताा है


➧ धारा - 65  :- कृषक को बेदखल करने या कब्जा बनाये रहने देने की शक्ति

 छोटानागपुर काश्तकारी, 1947 के द्वारा धारा-21 के तहत यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया है

➧ धारा - 66  :- कतिपय भूमि को कोड़कर में परिवर्तित करने का प्रतिषेघ (रोक)


 धारा - 67  :- कोड़कर  में अधिभोगाधिकार

 ऐसे रैयत, जो किसी भूमि का जोत धारण करता हो और उसके परिवार के किसी सदस्य ने उस भूमि को कोड़कर में परिवर्तित कर दिया हो, लेकिन वह 12 वर्ष तक उस भूमि पर खेती नहीं किया हो, तो प्रथम व्यक्ति का भूमि पर अधिभोगाधिकार बना रहेगा

➧ धारा - 67 (क) :- कोड़कर  में समपरिवर्तित भूमि के लगान का निर्धारण

➧ अगर कोई व्यक्ति भूमि को कोड़कर में बदला हो तो उस भूमि पर प्रथम कृषि वर्ष की फसल कटाई से 4 वर्ष तक कोई लगान का निर्धारण नहीं किया जाएगा। 4 वर्ष के पश्चात कोड़कर भूमि पर लगान का निर्धारण किया जाएगा, लेकिन वह लगान की  दर गांव के तृतीय वर्ग की धनहर भूमि के लिए प्रचलित दर के आधे से अधिक नहीं होगी।

➧ धारा - 68  :- काश्तकार को बेदखल किया जाना

➧ किसी भी काश्तकार को किसी डिक्री या उपायुक्त के आदेश के सिवाय किसी दूसरे तरीके से उसे जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता है। 

➧ धारा - 69  :- काश्तकार को  राहत पाने का अधिकार

➧ किसी अधिभोगी रैयत ने भूमि का उपयोग रूढ़ि और रीति के अनुसार किया हो और उसके कार्य के कारण भूमि के मूल्य में कोई गिरावट नहीं आया हो तथा भूस्वामी और काश्तकार के बीच हुए संविदा की शर्तों को नहीं तोड़ा हो, तो अधिभोगी रैयत राहत पाने का अधिकारी है

➧ धारा - 70  :- वेदखली का डिक्री या आदेश कब प्रभावी होगा

➧ इस अधिनियम में अधीन पारित आदेश उस कृषि वर्ष के अंत से या ऐसे पूर्ववर्ती तारीख जिसे न्यायालय निर्देशित करें, उसी के अनुसार प्रभावी होगा।


➧ धारा-71(क) :- विधिविरुद्ध अंतरिम भूमि पर अनुसूचित जनजातियों के सदस्य को कब्जा प्रत्यावर्तित करने की शक्ति उपायुक्त में अंतर्निहित रहेगी। 

➧ इस संदर्भ में निम्न विधान है:-

(i) यदि उपायुक्त को यह ज्ञात हो कि कोई व्यक्ति धारा-46 के नियम उल्लंघन कर अनुसूचित जनजाति के रैयत की जमीन कपट या छल पूर्वक प्राप्त किया है।  
➧ तो वह अंतरिति (क्रेता) सफाई देने का अवसर देगा। इसके पश्चात दोषी पाए जाने पर अंतरिति को बिना कोई रकम लौटाई ही उसका जमीन अनुसूचित जनजाति के सदस्य को वापस कर देगा। 

(ii) अंतरक  अर्थात विक्रेता का अगर कोई वारिस बारिश नहीं हो, तो वैसा स्थिति में स्थानीय नियम अनुसार किसी दूसरे अनुसूचित जनजाति के रैयत को उपायुक्त जमीन का पुर्नबंदोबस्त कर देगा। 

(iii) अगर अंतरित (क्रेता) के अंतरण (हस्तांतरण) के तारीख के 30 वर्ष के भीतर उपायुक्त को यह जानकारी मिलती हो, कि अंतरीति ने अनुसूचित जनजाति के सदस्य से प्राप्त जोत पर भवन निर्माण कर लिया हो और अंतरक (विक्रेता) उसका मूल्य चुकाने में रजामंद न हो तो ऐसे में उपायुक्त अंतरिति अर्थात क्रेता के 2 वर्ष के भीतर भवन हटाने का आदेश देगा, अगर क्रेता द्वारा भवन नहीं हटाया गया, तो उपायुक्त खुद हटाएगा। 


(v) यदि उपायुक्त जांच के उपरांत यह पाए कि अंतरिति (क्रेता) ने बिहार अनुसूचित क्षेत्र विनिमय 1969 कानून लागू होने के पहले ही किसी भूमि पर भवन का निर्माण कर लिया है, तो ऐसे में उपायुक्त अर्थात क्रेता को यह आदेश देगा, कि वह अंतर अर्थात विक्रेता को पुनर्वास के लिए समतुल्य भूमि उपलब्ध कराएं।

➧ साथ ही उपायुक्त द्वारा निर्धारित पुनर्वास राशि अंतरक को प्रदान करें। ऐसा करने पर अंतरिति को जमीन से जुड़े अधिकार की मान्यता उपायुक्त दे देगा। 

(vi) जाँच उपरांत अगर उपायुक्त को यह पता चले की अंतरिति अर्थात क्रेता ने कब्ज़ा द्वारा प्राप्त भूमि पर अपना हक़ अर्जित किया है तथा अंतरिती  अर्थात प्राप्त भूमि को लेने के लिए अंतरक तैयार नहीं है। तो ऐसी स्थिति में उपायुक्त उपयुक्त प्रति कर का निर्धारण कर सकता है।  

(vii) इस धारा के तहत आदिवासी जमीनों की पुनर्वापसी के लिए एक विशेष अदातलायी व्यवस्था अनुसूचित क्षेत्र विनिमय न्यायालय (SAR- Scheduled Area Regulation Court) कोर्ट की स्थापना की गई है 

➧ धारा-71(ख) :-  यदि कपट पूर्ण तरीके से कोई भूमि अंतरिति (विक्रय) की जाए, तो जांच उपरांत कपट करने वाले को दंड स्वरूप 3 वर्ष की सजा अथवा ₹1000 जुर्माना या दोनों लगेगा। अपराध जारी रहने की दशा में अपराध की अवधि तक अंतरिती अर्थात (क्रेता) को प्रत्येक दिन अधिकतम ₹50 अतिरिक्त जुर्माना देना होगा।

➧ धारा-72 :-  रैयत द्वारा भूमि का अभ्यर्पण (Slender)

 यदि कोई रैयत किसी करार से न जुड़ा हुआ हो तो वह किसी वर्ष के अंत में उपायुक्त की पूर्व मंजूरी लेकर अपने जोत को सैरेंडर कर सकता है, परंतु इसकी सूचना रैयत द्वारा भूस्वामी को सरेंडर के 4 माह पूर्व देना होगा। यदि वह ऐसे सूचना नहीं देता है, तो सरेंडर के पश्चात अगले कृषि वर्ष के लिए जोत भूमि का लगान का भुगतान भूस्वामी को करना ही होगा।

➧ धारा-73 :-  रैयत द्वारा भूमि का परित्याग

 यदि कोई रैयत भूमि का परित्याग स्वेच्छा से कर दे और लगान देना बंद कर दे तो उसकी भूमि को भूस्वामी किसी दूसरे को पट्टे में दे सकता है 

➧ कोई अधिभोगी रैयत 3 वर्ष के भीतर एवं अनाधिभोगी रैयत 1 वर्ष के भीतर उपरोक्त भूमि पर कब्जा वापस लेने का आवेदन उपायुक्त को दे, और उपायुक्त जांच उपरांत यह पाए के रैयत ने स्वेच्छा से भूमि का परित्याग नहीं किया था, तो वैसी स्थिति में रैयत द्वारा बकाया लगान के भुगतान करने के बाद रैयत को भूमि पर पुन: कब्जा दिलाने का आदेश दे सकता है। 

➧ धारा-74 :- किसी रैयत के अधिभोग का जारी रहना पट्टे की स्थिति पर निर्भर करता है 

➧ धारा-75 :- भूमि का माप

 प्रत्येक भूस्वामी को अपने क्षेत्राधीन भूमि का माप करने का अधिकार होगा। या इससे जुड़े दूसरे संपदा का भी वे सर्वेक्षण कर सकेगा। अधिभोगी रैयत सर्वेक्षण या माप का विरोध करें। तो भू-स्वामी उपायुक्त को आवेदन देकर इस संदर्भ में उचित दिशा-निर्देश प्राप्त कर सकेगा।

अध्याय -11 :-रुढ़ि और संविदा (धारा- 76 से 79)

➧ धारा-76   रूढ़ि की व्यावृति :-  रूढ़ि एवं प्रथा किसी अधिकार को प्रभावित नहीं करेगी। 

➧ धारा-77  सेवा भू धृतियों तथा जोतों के विषय में व्यावृति :- भू -धृति या जोत का प्रभाव अधिकार पर नहीं पड़ेगा। 

➧ धारा-78  वासभूमि:-


 धारा-79 :- अधिनियम के अपवर्जन का करार द्वारा प्रतिबंध

 इस अधिनियम के लागू होने के पूर्व या पश्चात कोई भूस्वामी किसी रैयत के साथ संविदा के माध्यम से कोई अधिभोगाधिकार को वर्जित नहीं करेगा और ना ही हटाएगा।

अध्याय-12 :-अधिकार अभिलेख और लगान का निर्धारण (धारा- 80 से 100(क)

➧ धारा-80 :- सर्वेक्षण करने और अधिकार-अभिलेख तैयार करने का आदेश देने की शक्ति

➧ राज्य सरकार राज्य सरकार किसी राज्य स्वराज अधिकारी द्वारा किसी स्थानीय क्षेत्र, भू-धृति या संपदा का सर्वे कराने या उससे जुड़े अधिकार अभिलेख कराने का आदेश दे सकती है

➧ धारा-81  :- अभिलिखित की जाने वाले विशिष्टयां 

 धारा-80 के आदेश अनुसार जो अधिकार अभिलेख तैयार होगा उसमें काश्तकार का नाम, भूमि की सीमा, उसका वर्ग, भूमि की सीमा, भू-स्वामी का नाम, भुगतान होने वाला लगान , लगान निर्धारण की प्रक्रिया जैसे शर्ते वर्णित होगी।

 धारा-82 :- जल के विषय में सर्वेक्षण करने तथा अधिकार-अभिलेख तैयार करने का आदेश देने की शक्ति

 राज्य सरकार किसी ऐसे राजस्व अधिकारी को आदेश निर्गत कर सकती है, जो भू -स्वामी या काश्तकारों के बीच जल के उपयोग एवं उसके बहाव से संबंधित विवाद का निपटारा कर सकें।

➧ धारा-83 :-अधिकार-अभिलेख का प्रारंभिक प्रकाशन, संशोधन और अंतिम प्रकाशन।

➧ धारा-84 :-अधिकार-अभिलेख के अंतिम प्रकाशन और उसकी शुद्धता के बारे उपधारणाएँ।

➧ धारा-85 :- उचित लगान का परिनिर्धारण


 धारा-86 :- लगान परिनिर्धारण में अगर किसी प्रकार का विवाद हो तो ऐसे में राजस्व अधिकारी नए सिरे से तैयार किए गए अधिकार अभिलेख पर विचार करते हुए, धारा 85 के तहत लगान का परिनिर्धारण कर सकेगा।

➧ धारा-87 :-राजस्व अधिकारी के समक्ष संस्थित किया जाना

➧ अधिकार अभिलेख के अंतिम प्रकाशन हो जाने के बाद अगर अलग-अलग पक्षों के बीच कोई विवाद हो तो इसे राजस्व अधिकारी के समक्ष रखा जा सकता है । ऐसे में राजस्व अधिकारी इस वाद/मामले को किसी सक्षम  न्यायालय में सुनवाई हेतु भेज सकता है

➧ धारा-87(क)  :- कतिपय कार्यवाहियो और वादों में उपरैयत को भी पक्षकार बनाया जाना 

➧ धारा-88  :-अगर लगाने या उससे जुड़े किसी दूसरे मामलों पर नए फैसले आते हैं, तो उससे अधिकार अभिलेख में प्रविष्टि किया जायेगा। 


 राज्य सरकार द्वारा नामित राजस्व अधिकारी आवेदन मिलने पर या फिर स्वप्रेरणा से अधिकार अभिलेख के प्रारूप में की गई किसी भी प्रवृष्टि या आदेश को चाहे तो 12 महीने के भीतर पुनरीक्षण कर सकता है

➧ धारा-90  :-अधिकार-अभिलेख की भूलों की राजस्व अधिकारी द्वारा शुद्धि किया जाएगा 

 धारा-91 :-अधिकार-अभिलेख के आदेश को रोका जाना 

 अधिकार अभिलेख की तैयारी के किसी आदेश को अधिकार अभिलेख के अंतिम प्रकाशन के पश्चात् छः माह तक उपायुक्त या सिविल न्यायालय द्वारा रोका नहीं जा सकेगा। 

➧ धारा-92  :-अधिकार-अभिलेख संबंधी विषयों  में न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन 

 अधिकार अभिलेख की तैयारी से जुड़े कोई भी वाद/मुकदमा किसी भी न्यायालय में नहीं लाया जा सकता।
 
 धारा-93  :-अधिकार-अभिलेख के अंतिम प्रकाशन तक उपायुक्त या सिविल न्यायालय के समक्ष कतिपय कार्यवाहियों पर रोक

 अधिकार अभिलेख के अंतिम प्रकाशन से छः महीने तक सम्बंधित भूमि या उसके किसी कस्तकार को प्रभावित करने से जुड़ा कोई आवेदन न तो सिविल न्यायालय में दायर किया जाएगा और न ही उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

➧ धारा-94  :- जिस कालावधि के लिए अधिकार-अभिलेख में लगान दर्ज किया हो वह अपरिवर्तित रहेगा।

➧ धारा-95 :- इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियों के खर्च-अधिकार अभिलेख की तैयारी एवं संपूर्ण प्रक्रिया में खर्च अधिभोगियों के द्वारा चुकाया जाएगा। 


➧ धारा-97 :- वह तारीख, जब से परिनिर्धारित लगान प्रभावी होगा।

➧ नियमानुसार परिनिर्धारित लगान अगले कृषि वर्ष के प्रारंभ से लागू होगा। 

➧ धारा-98  :-राज्य सरकार के आदेशाधीन अधिकार-राज्य सरकार चाहे तो, अपने आदेश के जरिए अभिलेख का पुनरीक्षण एवं  लगान का नया परिनिर्धारण का आदेश जारी कर सकता है।  

➧ धारा-99 :-लगान में वृद्धि


➧ धारा-100 :- इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व कतिपय अधिकारियों के अभिलेख के लिए दिए गए निर्देशों का विधिमान्यकरण।

➧ इस  अधिनियम के पूर्व बंगाल काशतकारी अधिनियम, 1885 की धारा-101 के अंतर्गत, यदि इस अधिनियम धारा-81 के उपखण्ड (ढ )में अधिकार को अभिलिखित किया जाये, तो विधिमान्य होगा।  

➧ धारा-100(क)  :-चराई,वन-उपज लेने आदि के अधिकारों एवं तत्त्संबंधी भुगतान के सम्बन्ध में कतिपय उपबंधों का लागु होना

➧ चराई, वन-उपज लेने, मत्स्य पालन आदि अधिकार उस व्यक्ति का होगा जो भूमि धारण करता हो। 

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Thursday, August 12, 2021

Chotanagpur Kashtkari Adhiniyam 1908 Part-4 (छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908)

Chotanagpur Kashtkari Adhiniyam 1908 Part-4


छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 part-4

अध्याय 8 :-जोतों  और भूघृतियों  के पट्टे और अंतरण (धारा- 44 से 51) 

➧ धारा - 44 :- रैयत का पट्टे का अधिकार होना

➧ प्रत्येक रैयत अपनी भूस्वामी से पट्टा प्राप्त करने का अधिकारी होगा। पट्टे में सभी बातें जैसे - भूमि का क्षेत्रफल, वार्षिक लगान, भुगतान की किस्ते और अन्य शर्तें उल्लेखित होती हैं।  

➧ धारा -45 :- भूस्वामी का प्रतिलेख वचनबंध के लिए हकदार होना

➧ जब कोई भूस्वामी किसी का काश्तकार को कोई पट्टा देगा तो गोस्वामी पट्टा के शर्तों के अनुरूप एक प्रतिलेख पाने का हकदार होगा 

➧ धारा -46 :-  रैयतों द्वारा अपने अधिकारों के अंतरण पर प्रतिबंध


(i) यदि अधिभोगी रैयत अनुसूचित जनजाति (एस.टी)  का सदस्य हो, तो उपायुक्त के अनुमति से अपनी जोत  के किसी भाग को विक्रय, दान या अंतरण कर सकता है बशर्ते की खरीदार रैयत उसी स्थानीय निवासी हो और अनुसूचित जाति का सदस्य हो 

(ii) यदि अधिभोगी रैयत अनुसूचित जाति या पिछड़े वर्ग का सदस्य हो, तो उपायुक्त के अनुमति से अपनी जोत  या उसके किसी भाग को विक्रय, विनियम, दान, वसीयत या पट्टे द्वारा किसी व्यक्ति को दें (अंतरण) कर सकता है बशर्ते कि खरीदार व्यक्ति अनुसूचित जाति या पिछड़े वर्ग का सदस्य हो और उसी जिले का निवासी हो 

(iii)  यदि कोई अधिभोगी रैयत अपनी जोत या उसके किसी भाग का अंतरण, बिक्री, वसीयत, दान के द्वारा किसी कोऑपरेटिव सोसाइटीज को, राष्ट्रीकृत बैंक या केंद्र सरकार या राज्य सरकार के कोई उपक्रम को करना चाहता है, तो कर सकता है 

(iv) यदि कोई भोगी रैयत सामान्य जाति का सदस्य हो तो वह किसी को भी अपनी भूमि बिक्री कर सकता है

(v) अधिभोगी रैयत अपने जोत या उसके किसी भाग का 5 वर्ष से अधिक अवधि के लिए विक्रय, दान या संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) नहीं कर सकता  

(vi) यदि अधिभोगी रैयत अपनी जोत या उसके किसी भाग को चाहे, तो 7 वर्ष से कम अवधि के लिए भुगतबंध बुक बंद कर सकता है  

(vii) अगर कोई  अधिभोगी रैयत चाहे, तो बिहार और उड़ीसा सहकारी समिति अधिनियम 1935 के अधीन रजिस्ट्री कृत कंपनी को 15 जुलाई 15 वर्ष हेतु अपनी भूमि  भुगतबंध बंधक कर सकता है  

(viii) अगर किसी जोत या उसके भाग के संबंध में ऐसा वाद (केस)कोर्ट में लंबित हो जिसमें एक पक्ष अनुसूचित जनजाति का सदस्य हो और दूसरा पक्ष गैर अनुसूचित जनजाति का सदस्य हो, तो ऐसे मामले में उपायुक्त को तीसरा पक्षकार अवश्य होगा   (धारा- 46 , 3 'क')

(ix) अगर कोई रैयत ने जिस समय अवधि के लिए किसी व्यक्ति को जमीन अंतरित किया हो, समय अवधि समाप्त होते ही 3 वर्ष के भीतर रैयत के आवेदन पर, उपायुक्त रैयत को जमीन वापस दिलाएगा । (धारा-46, 4)

(x) अगर कोई जोत धारकया रैयत उपायुक्त के पास इस बाबद आवेदन दे, कि उसके भूमि का अंतरण के मामले में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है, तो उपायुक्त ऐसे आरोपों की जांच करेगा, परंतु यह आवेदन उपायुक्त तभी स्वीकार करेगा, जब जोत धारक ने अपनी भूमि के अंतरण की तारीख से 12 वर्ष के समय अवधि के भीतर आवेदन प्रस्तुत किया हो (ऐसे मामलों में डी.सी. स्वत: भी संज्ञान ले सकता है।)  (धारा-46, 4 'क')

(xi) अगर उपायुक्त जांच के पश्चात यह पाता है, कि किसी जोत धारक की भूमि अंतरण में आवश्यक नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है, फिर भी जोतधारक  ने आवेदन प्रस्तुत किया है, तो उपायुक्त आवेदन को रद्द कर देगा तथा आवेदनकर्ता को मामले में होने वाले खर्च का भुगतान करने का आदेश देगा। (धारा-46, 4, 'ख')   

(xii) यदि जांच के बाद उपायुक्त यह पाता है, कि खरीदार पक्ष ने नियम का उल्लंघन करते हुए भूमि का अंतरण अपने पक्ष में कराया है, तो वह जमीन खरीदार पक्ष (अंतरिती) से वापस लेकर विक्रयकर्ता (अंतरक)  को उसकी जमीन पर दखल वापस दिलाएगा 

 परंतु यदि खरीदार (अंतरिती) पक्ष ने जोत भूमि पर भवन या संरचना का कार्य निर्मित कर लिया हो, और विक्रयकर्ता (अंतरक)  उसके मूल्य का भुगतान नहीं करना चाहता हो, तो उपायुक्त खरीदार पक्ष को यह आदेश देगा कि, वह 2 वर्ष के भीतर अपने निर्मित संरचना को हटा लें 

➧ परंतु यदि उपायुक्त को यह जानकारी प्राप्त हो जाये कि खरीदार पक्ष ने जोत भाग पर संरचना का निर्माण छोटानागपुर अभिघृति अधिनियम 1969 के आरंभ से पहले कर लिया है, उस स्थिति में नियम का उल्लंघन होने के बावजूद भूमि अंतरण को विधि की मान्यता दे देगा। ऐसी स्थिति में खरीदार पक्ष समतुल्य मूल्य की भूमि निकट के किसी वैकल्पिक जोत या भाग में उपलब्ध करा दें या उपायुक्त द्वारा निर्धारित की गई राशि का भुगतान कर कर दे। सामान्य तौर पर इससे ही कम्पनसेशन कहा जाता है। (धारा-46, 4, 'ग')

➧ धारा -47  :- न्यायालय आदेश के जरिए रैयती अधिकार के विक्रय पर प्रतिबंध 

➧ किसी न्यायालय के द्वारा किसी रैयत को उसकी जोत या उसकी किसी भाग के विक्रय के लिए कोई आदेश या  डिक्री नहीं पारित किया जाएगा । परंतु निम्न परिस्थितियों में समाना लें परिस्थितियों में न्यायालय द्वारा रैयत के जोत को विक्रय का आदेश जारी किया जा सकता है 
(i) जोत के संबंध में बकाया लगान की वसूली के लिए  
(ii) किसी बैंक ऋण या उधार रकम की वसूली हेतु 
(iii) बिहार, उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम द्वारा उपबंधित प्रक्रिया के अधीन परंतु उपरोक्त परिस्थिति में किसी जमीन का विक्रय हो रहा तो भी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के जमीन को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का ही कोई सदस्य खरीद सकता है 

➧ धारा -48 :- भुईहारी भूघृति के अंतरण पर प्रतिबंध 

➧ किसी भुईहरि कुटुम का कोई भी सदस्य छोटानागपुर भूघृति  अधिनियम-1869 के अंतर्गत किसी भी भुईहरि भूघृति का या उसके भाग का अंतरण कर सकता है। यह  अंतरण ठीक उसी प्रकार का होगा जैसे धारा- 46 में वर्णित है । राज्य सरकार चाहे तो भुईहरि कुटुंब के किसी व्यक्ति को उसके  भूघृति का विक्रय, दान, विनिमय द्वारा अंतरित करने के संदर्भ में नियम बना सकती है 

➧ धारा -49 :-कतिपय प्रयोजनों के लिए अधिभोग जोत या भुईहरि एवं  भूघृति का अंतरण

 धारा-46 , 47 तथा 48 के अंतर्गत कोई भी भुईंहरी खूँट का सदस्य अपने जोत या भूघृति का स्थानांतरण कर सकता है :-
(ii) किसी खनन कार्य हेतु या इससे जुड़ी कोई परियोजना हेतु या इससे जुड़े पथ निर्माण हेतु भूमि को अधिसूचित किया जाए 

➧ धारा -50  :-कतिपय प्रयोजनों के लिए भू-स्वामी द्वारा घृति या जोत का अर्जन

➧ धारा 46 एवं 47 के अंतर्गत उपायुक्त किसी जोत के भूस्वामी के द्वारा आवेदन करने पर भूमि के अर्जन करने का आदेश दे सकता है। जैसे-
(i) खैराती, धार्मिक या शैक्षणिक कार्य हेतु 
(ii) राज्य सरकार द्वारा खनन कार्य हेतु 
(iii) यदि जोत के किसी भाग पर मंदिर, मस्जिद, पूजा स्थल, पवित्र उपवन, कब्र या शमशान हो तो उपायुक्त भूमि के अर्जन को प्राधिकृत नहीं करेगा 

➧ धारा -51  :- अंतरण की सूचना के बिना भूतपूर्व स्वामी को दिए गए लगान के लिए अभिधारी भू-स्वामी के हित के अंतरिती के प्रति दायी नहीं होगा 

अध्याय-9 :- लगान के बारे में साधारण उपबंध (धारा-52 से 63) 

➧ धारा -52 :- किस्तलगान का भुगतान एक कृषि का वर्ष में प्रत्येक तिमाही पर चार सामान्य किस्तों में जमा होगा 

➧ धारा -53 :- लगान भुगतान की रीतियाँ

➧ लगान का जमा माल कचहरी में या मनीआर्डर से किया जाना चाहिए तथा लगान की राशि भूस्वामी या अभिकर्ता के द्वारा उपायुक्त के यहां किया जाएगा 

➧ धारा -54 :-लगान तथा उसके ब्याज के लिए रसीद

➧ लगान और उस पर देय ब्याज की राशि का भुगतान करने पर रसीद निशुल्क प्राप्त करने का अधिकार रहेगा  लगान के भुगतान की रसीद अगर भूस्वामी नहीं देता है, तो उसे 1 माह का कारावास या ₹100 जुर्माना या दोनों का दंड दिया जा सकता है

➧ धारा -55 :- उपायुक्त के न्यायालय में लगान का निक्षेप 


➧ धारा -56 :-जमा  का प्राप्ति और उसके भुगतान की प्रक्रिया

➧ भुगतान विवाद होने पर लिखित आवेदन प्राप्त होने के आधार पर उपायुक्त लगान का जमा लेकर रसीद दे देगा। तथा उपायुक्त तुरंत इसकी सूचना भूस्वामी को दे देगा 

➧ धारा -57 :- जमा के पूर्व में लगान के लिए वाद या आवेदन की परिसीमा


➧ धारा -58  :- लगान का बकाया और उस पर ब्याज के प्रावधान 

(i) लगान की किस्त जिस दिन देय हो, उस दिन सूर्यास्त के पूर्व भुगतान नहीं किया गया, तो उस कृषि वर्ष के अंत में लगान बकाया समझा जाएगा 

(ii) यदि भूस्वामी राज्य सरकार हो, तो कृषि वर्ष के अंत में लगान का भुगतान न करने पर लगान बकाया समझा जाएगा 

(iii) लगान की बकाया राशि पर वसूली पक्ष अधिकतम 6.25% साधारण ब्याज वार्षिक लगेगा 

(iv) यदि अभिधारी किसी कृषि वर्ष में बकाया लगान की राशि का भुगतान अगले कृषि वर्ष के भीतर कर दे तो, भुगतान लगान की राशि पर अधिकतम 3% की दर से ही ब्याज आरोपित होगा  

➧ धारा -59 :- भू -धारक की बेदखली और बकाए के कारण पट्टे का रद्द किया जाना

➧ यदि किसी भूधारक के यहां लगान बकाया हो तो उसके पट्टे को रद्द किया जा सकता है 

➧ धारा -60 :लगान के बकाया का काश्तकारी पर प्रथम भार होगा 

➧ साधारणत: लगान का भार कश्तकारी पर ही होता है, परंतु लगान के बकाए का भुगतान करने हेतु कश्तकारी का विक्रय कर दिया जाए तो, खरीददार उस कश्तकारी का विक्रय की तारीख के पहले के लगान की भार से मुक्त कर देगा 

➧ धारा -61 :वस्तुरूप में देय लगान का रूपांतरण

➧ किसी अधिभोगी रैयत द्वारा लगान का भुगतान फसल के रूप में जमा किया जा रहा हो, और आगे वह इस लगान का भुगतान धन (नगद) के रूप में करना चाहे तो इसके लिए वह उपायुक्त या राजस्व अधिकारी के यहां आवेदन जमा करेगा  


➧ धारा -61 (क) :- अधिभोगी जोत के लगान का रूपांतरण

 यदि राजपाल सूचना के द्वारा आदेश दे, तो उपायुक्त अधिभोगी  रैयत के पक्ष में लगान का रूपांतरण धन लगान के रूप में कर सकता है 

➧ धारा -62 :- रूपांतरित लगान के अपरिवर्तित रहने की कालावधि 


➧ धारा -63  :-स्थानीय उपकर लगाने या निर्धारित लगान से अधिक उदग्रहण करने पर दंड का नियम 

➧ यदि कोई भूस्वामी किसान से विधि पूर्वक दे लगान बकाया ब्याज राशि के अलावा कोई अतिरिक्त कर वसूलता है, या लगान बढ़ाकर बसूलता है, तो ऐसे में भूस्वामी को छह माह के साधारण कारावास या 500 /- जुर्माना या दोनों दंड के रूप में दिया जा सकता है 

अध्याय-9 (क) :- बंजर भूमि का बंदोबस्त  (धारा-63 (क) से 63 (ख) 

➧ धारा -63 (क) :- बंजर भूमि का बंदोबस्त पट्टे द्वारा किया जाना 

➧ राज्य सरकार बंजर भूमि का बंदोबस्त विहित प्रारूप में पट्टे पर किया जाएगा, प्रत्येक पट्टा की दो प्रति बनेगी जिसमें एक प्रति रैयत को और एक प्रति जिला उपायुक्त को भेज दी जाएगी 

➧ धारा -63 (ख)  :- बंदोबस्त को अपास्त (रद्द) किए जाने का प्रावधान

➧ इस विधि से प्राप्त बंदोबस्त की कि 5 वर्षों की अवधि तक प्राप्त जमीन पर खेती नहीं की गई हो या धारा-46 के उल्लंघन का दोषी पाया जाए तो धारा 63-(क) के अंतर्गत बंदोबस्त को अपास्त रद्द किया जा सकता है 






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Friday, July 9, 2021

Jharkhand Suchna Prodyogiki (झारखंड सूचना प्रौद्योगिकी)

Jharkhand Suchna Prodyogiki

झारखंड सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से संबंधित संस्थाएं

1. जैप आईटी (JAPIT) :- भारत सरकार की विभिन्न महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार को एक स्वायत्त संस्था के रूप में सूचना प्रौद्योगिकी एवं  ई-गवर्नेंस विभाग के अधीन जैप-आईटी  (झारखंड एजेंसी फॉर प्रोमोशन ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी) का गठन किया गया है। 

झारखंड सूचना प्रौद्योगिकी

➦ जैप-आईटी सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग के अंतर्गत एक निबंधित संस्था है इसका गठन 29.03.2004 को किया गया है तथा यह सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 21, 1860 के अंतर्गत निबंधित है। 

➦ सूचना प्रौद्योगिकी से विभिन्न प्रक्रियाओं का सरलीकरण करना एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस लागू करना है इसके द्वारा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कंप्यूटरीकरण के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की सेवाएं विकसित क्रियाविन्त कर की जा रही है, जैसे:- झारनेट, ई-प्रोक्योरमेंट, ई- मुलाकात, ई-निबंधन, ई-कोर्ट, ई-जिला, ई-नागरिक, पोर्टल का विकास, ई-कल्याण, ई-कल्याण, फाइल ट्रैक्टर, ई-ऑफिस इत्यादि हैं

2-झारखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (JSAC) :- झारखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, रांची की स्थापना वर्ष 2003 में सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग, झारखंड सरकार के अंतर्गत इसरो, भारत सरकार के सहयोग से की गई है केंद्र के मुख्य उद्देश्य निम्नवत है:-

(i) आंतरिक तकनीकी के सहारे संपूर्ण राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का आकलन एवं मानचित्रीकरण करना

(ii) अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग के क्षेत्र में सुदूर संवेदन, भौगोलिक सूचना तंत्र, भूमंडलीय स्थानीकरण तंत्र  तथा उपग्रह संपर्क के सहारे राज्य के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना।

➦ रिमोट सेटिंग द्वारा GIS प्रणाली का उपयोग करते हुए लगभग 85 थिमेटिक लेयर विकसित की है, जिसका उपयोग विभिन्न विभागों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन तथा योजना हेतु किया जा रहा है

3. राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) :- झारखंड राज्य की स्थापना के बाद से राज्य मुख्यालय एवं 22 जिलों में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र लगातार महत्वपूर्ण सेवाएं देता आ रहा है

➦ प्रारंभ में मंत्रालयों सचिवालयों, विधानसभा एवं राजधानी अवस्थित सभी प्रमुख भवनों की नेटवर्किंग, इंटरनेट की सुविधा सभी ज़िलों , सभी माननीय मंत्रियों एवं सचिवों के कक्ष में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का नेटवर्क एवं राज्य की अधिकृत वेबसाइट के निर्माण में इसका उल्लेखनीय योगदान रहा है

➦ एन.आई.सी. के राज्य मुख्यालय (नेपाल हाउस) में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग स्टूडियो, सुरक्षा के मानकों पर आधारित आधुनिक डाटा सेंटर की स्थापना एवं जिला स्तर तक 34Mbps गति तक की तीव्र नेटवर्क संरचना के विकास से भी राज्य की सूचना तकनीकी की संरचना मजबूत हुई है 

➦ कालांतर में इस संस्था के द्वारा ट्रेजरी कंप्यूटरीकरण, जिला परिवहन कार्यालयों में निबंधन एवं लाइसेंसों का कंप्यूटरीकरण, वैट कंप्यूटरीकरण इत्यादि का विकास किया गया है


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Tuesday, July 6, 2021

Jharkhand Ki Aarthik Sthiti (झारखंड की आर्थिक स्थिति)

Jharkhand Ki Aarthik Sthiti

राज्य गठन से पूर्व झारखंड की आर्थिक स्थिति

➦ किसी भी राज्य की आर्थिक स्थिति उस राज्य में पाए जाने वाले संसाधनों पर निर्भर करती है। झारखंड संसाधनों से परिपूर्ण क्षेत्र है तथा यहां विकास की असीम संभावनाएं निहित है। 

➦ झारखंड मुख्य रूप से आदिवासी राज्य के रूप में चिन्हित राज्य है और जनजातीय समुदाय संपूर्ण भारत में पिछड़ेपन के लिए प्रसिद्ध है झारखंड के आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन भी इसी संदर्भ में किया जा सकता है।  

झारखंड की आर्थिक स्थिति

➦ 
किसी भी राज्य में आर्थिक स्थिति का आंकलन आर्थिक विकास के नाम से संबोधित किया जाता है तथा इसे व्यापक रूप से समग्र विकास या समृद्धि का नाम दिया जाता है। 

 झारखंड के झारखंड के 'आर्थिक विकास' के अंतर्गत आर्थिक क्रियाकलापों जैसे :-
(i) कृषि एवं कृषि संबंधित क्षेत्र 
(ii) औद्योगिक क्षेत्र एवं
(iii) सेवा क्षेत्रों 
को शामिल किया जाता है। इन्हीं तीनों क्षेत्रों का विकास किसी राज्य या देश को आगे बढ़ाने में 'इंजन' का कार्य करती है।  

 झारखंड के आर्थिक विकास को गति प्रदान करने में इन तीनों क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है दूसरी और यहां खनिजों की विद्यमानता, सस्ते श्रमिकों और भौगोलिक दृष्टिकोण से उद्योगों के प्रति बेहतर स्थितियों ने आर्थिक विकास का माहौल तैयार किया है

➦ झारखंड के आर्थिक विकास को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है 

(i) 1947 से 2000 तक -- आजादी के पश्चात आर्थिक विकास 
(ii) 15 नवंबर, 2000 के बाद  - राज्य गठन के पश्चात आर्थिक विकास

(I) राज्य गठन से पूर्व झारखंड की आर्थिक स्थिति

 झारखंड शुरू से ही खनिज संसाधनों से युक्त प्रदेश था। अतः इस क्षेत्र में उद्योग स्थापना के लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद थी। अतः केंद्र एवं संयुक्त विहार की सरकार ने इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जैसे:-
(i) टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी    -  190(जमशेदपुर)
(ii) हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड         -   1924 (घाटशिला)
(iii) इंडियन एलुमिनियम कंपनी     -  1938 (मुरी)
(iv) दामोदर नदी-घाटी परियोजना   -  1948 
(v) सिंदरी में रासायनिक कारखाना  -  1951 (धनबाद)
(vi) हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन   -  1958 (रांची)
(vii) बोकारो स्टील प्लांट                -   1964 (बोकारो)
(ix) यूरेनियम प्रोसेसिंग प्लांट         -   1967 (जादूगोड़ा)
(x) सीमेंट फैक्ट्री                            -   1921 (जपला)

 याद रहे की आजादी के पहले से ही ब्रिटिश काल में झारखंड की पहचान औद्योगिक क्षेत्र के रूप में के रूप में हो चुकी थी और इस दिशा में कई कंपनियां पहले से ही स्थापित हो चुकी थी

 राज्य गठन से पहले और आजादी के बाद झारखंड में कुछ सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे जैसे :- 
(i) 1960     -   रांची यूनिवर्सिटी की स्थापना
(ii) 1980    -   बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना
(iii) 1992   -   विनोबा भावे विश्वविद्यालय का गठन किया गया
(v) 1955    -   बिरसा इंस्टिट्यूट  ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना
(vi) 1926   -    इंडियन स्कूल ऑफ माइंस की स्थापना 
(vii) 1925  -   रिनपास की स्थापना
(viii) 1950 -   रिम्स (रांची आर्युविज्ञान संस्थान) आदि की स्थापना 

➦ उपरोक्त सराहनीय पहल के बावजूद झारखंड आर्थिक विकास के मोर्चे पर बेहद पिछड़ा हुआ राज्य था। कई अर्थशास्त्री तो छोटानागपुर क्षेत्र को बिहार का उपनिवेश कह कर संबोधित करते थे औद्योगिक गतिविधियां झारखंड में आदिवासियों के जीवन में विकास का अग्रदूत न बन कर उनके जीवन में कई प्रकार के चुनौतियों का विषय बन गई 

➦ आदिवासी समाज के प्रमुख समस्याएं  निम्न थी

(i) भूमि हस्तांतरण की समस्या  
(ii) बेरोजगारी एवं शिक्षा की समस्या 
(iii) वन दोहन की समस्या  
(iv) विस्थापन एवं पुनर्वास की समस्या  
(v) धर्मांतरण की समस्या   
(vi) मद्यपान एवं स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों की समस्या  
(vii) नक्सलियों का उत्पीड़न आदि  

➦ संभवत : इन्हीं समस्याओं ने पिछले 50 वर्षों से आदिवासी राज्य के रुप में झारखंड गठन की मांग को भी जिंदा रखा तथा आगे बढ़ाया  


(II) 15 नवंबर, 2000 के बाद राज्य का विकास 

➦ स्वतंत्र रूप से राज्य गठन के बाद झारखंड क्षेत्र को बिहार से अलग 46% भूमि प्राप्त हुई और राजस्व स्रोत का 67% हिस्सा प्राप्त हुआ  

➦ नवगठित राज्य झारखंड के पास राज्य गठन के समय से ही निम्न प्रमुख चुनौतियां विद्यमान थी  
(i) आर्थिक व्यवस्था में कृषि की प्रधानता 
(ii) दैध अर्थव्यवस्था का प्रतिरूप
(iii) बेरोजगारी दर उच्च होना 
(iv) प्रति व्यक्ति आय का निम्न होना
(v) अपर्याप्त बिजली सुविधा 
(vi) यातायात एवं संचार साधनों की कमी 
(vii) उग्रवादी गतिविधियां
(viii) अपर्याप्त सिंचाई व्यवस्था
(ix) अधिक जनसंख्या का दबाव 
(x) निम्न तकनीक का स्तर 
(xi) गरीबी का दर उच्च होना 
(xii) सेवा क्षेत्र का पिछड़ापन 

➦ राज्य के गठन के पश्चात इन चुनौतियों के समाधान हेतु राज्य सरकार द्वारा निरंतर कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए, जो राज्य के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं जैसे :-
(i) औद्योगिक विकास हेतु 2001, 2011, 2016 में औद्योगिक नीति की घोषणा 

(ii) राज्य में विद्युत आपूर्ति हेतु 2001 में राज्य विद्युत बोर्ड का गठन किया गया 

(iii) तीव्र परिवहन साधनों के विस्तार हेतु राज्य राजमार्गों का विकास 

(iv) 6 नए जिलों का निर्माण एवं आवश्यकता अनुसार प्रमंडल, अनुमंडल एवं प्रखंडों का व्यक्ति विकेंद्रीय करण 

(v) पेसा कानून के तहत प्रत्येक 5 वर्ष पर पंचायत एवं नगर निगम का चुनाव कराना 


(vii) मेक इन इंडिया के तर्ज पर 'मेक इन झारखंड' कार्यक्रम को बढ़ावा 

(viii) वर्तमान सरकार का लक्ष्य 2025 तक झारखंड को "स्टील हब ऑफ इंडिया" बनाने का है और उत्पादन क्षमता को 25 मिलियन टन  ले जाने का लक्ष्य रखा है

(ix) सरकार द्वारा 2016 में औद्योगिक नीति को व्यापक था प्रदान की गई, जिसके तहत निर्यात प्रोत्साहन,  फिल्म सिटी, पर्यटन विकास, फूड प्रसंस्करण, औद्योगिक पार्क आदि का विकास किया जाना है 

(x) सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े कदमों को उठाते हुए देवघर में (AIIMS) ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस) की स्थापना की गई है

(xi) बरही में औद्योगिक कलस्टर का निर्माण किया जा रहा है 

(xii) सरकार द्वारा जनजातियों के विकास एवं उन्हें प्रोत्साहन हेतु 'स्टार्ट-अप' स्टैंड-अप हब कार्यक्रम चलाए गए, जो उन्हें रोजगार जो उन्हें रोजगारोन्मुख बनाये हैं 

(xiii) राज्य में कैसे शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना - केंद्रीय विश्वविद्यालय, रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, नये विश्वविद्यालय के रूप में कोल्हान एवं मेदनीनगर में विश्वविद्यालय का निर्माण, मेडिकल कॉलेज की स्थापना आदि 


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Saturday, July 3, 2021

Jharkhand Ke Vividh Tathya- Part-2 (झारखंड के विविध तथ्य)

Jharkhand Ke Vividh Tathya- Part-2

विशिष्ट इंडिया रिजर्व (आदिम जनजाति) बटालियन का मुख्यालय दुमका से स्थानांतरित कर पाकुड़ किया गया है 

 सरकारी नौकरी एवं शैक्षणिक संस्थानों में निः शक्तों को आरक्षण 3% से बढ़ाकर 5% कर दिया गया है

➦ झारखंड में चार काउंटर इमरजेंसी एंड एंटी टेररिस्ट स्कूल (नेतरहाट, पदमा, मुसाबनी एवं रांची के टेंडर गांव) संचालित है

झारखंड के विविध तथ्य

➦ विधिक सहायता अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत दर्ज वैसे मामले में जिनमें आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है, से संबंधित पीड़ितों को एक मुश्त  ₹5000 विधिक सहायता प्रदान की जाती है।

➦ देश में संचालित ग्राम स्वराज अभियान योजना के अंतर्गत झारखंड के 252 गांवों को शामिल किया गया है

➦ राज्य में 14 अप्रैल, 2018 को ग्राम स्वराज अभियान का शुभारंभ चतरा के शेषनाग गांव में किया गया है इस अभियान में मुख्य रूप से वैसे दलित बहुल गांवों का चयन किया गया है, जो घोर अपेक्षित एवं आर्थिक रूप से पिछड़े हैं

 स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए महिला सहायता समूह "पूजा गुलाब सरस्वती सूर्यमुखी" को एक करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है

➦ राज्य में मधुमक्खी पालन हेतु "मीठी क्रांति" आरंभ की गई है

 देवघर के देवीपुर में प्लास्टिक पार्क की स्थापना का प्रावधान किया गया है

➦ राज्य में कोकून का सर्वाधिक उत्पादन दुमका जिले में होता है

 राज्य के गिरिडीह जिले के मिर्जागंज में दुग्ध का शीतलन केंद्र स्थापित किया जा रहा है

 देश के ईस्ट जोन में एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में रांची जिला के बुंडू को क्लीनेस्ट सिटी घोषित किया गया है 

➦ निजी क्षेत्र में 2 नए विश्वविद्यालय साईनाथ एवं उषा मार्टिन विश्वविद्यालय की स्थापना की मंजूरी दी गई है

 नीति आयोग द्वारा मार्च 2018 ईस्वी में जारी ट्रांसफॉरमेशन ऑफ एसिपरेशनल डिस्ट्रिक्ट स्किल डेवलपमेंट रैंकिंग में पूर्वी सिंहभूम जिला देश में पहले स्थान पर है इस सूची में लोहरदगा को सातवां स्थान प्राप्त हुआ है 

➦ नीति आयोग द्वारा मार्च 2018 ईस्वी में जारी 101 जिलों की स्वास्थ्य-पोषण सुविधाओं की रैंकिंग में गुमला 12वें स्थान पर तथा पाकुड़ 50 में स्थान पर है 

➦ फरवरी 2018 में नीति आयोग द्वारा जारी हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट में स्वास्थ सुधार में किए गए प्रयासों में  झारखंड को प्रथम स्थान प्रदान किया गया है, जबकि ओवर ऑल रैंकिंग में झारखंड को 14वाँ  स्थान प्राप्त हुआ है

➦ जमशेदपुर शहर ने स्वच्छता ऐप डाउनलोड में झारखंड में प्रथम स्थान प्राप्त किया है यह मध्यप्रदेश के देवास शहर के बाद देश का दूसरा शहर बना

➦ केंद्रीय श्रम एवं नियोजन विभाग, भारत सरकार के अनुसार झारखंड के पत्थर और कोयला खदान में कार्यरत 11 हज़ार श्रमिक सिलकोसिस नामक बीमारी से ग्रसित है

➦ टाटा समूह को लगातार पांचवीं बार वर्ष 2017 का बेस्ट इंडियन ब्रांडस रिपोर्ट में सर्वश्रेष्ठ ब्रांड चुना गया है। यह रिपोर्ट ब्रांड परामर्श फर्म इंटरब्रांड इंडिया द्वारा जारी किया जाता है 

 झारखंड सरकार शहीदों के परिजनों को घर बनाने के लिए 12 पॉइंट 5 डिसमिल और खेती के लिए 5 एकड़ जमीन देगी। पहले से उन्हें ₹10 लाख रूपये देने का प्रावधान है

 झारखंड सरकार ने 20 फिल्मों के निर्माण की स्वीकृति दी है इसमें संथाली भाषा की 4 , नागपुरी की 3, बांग्ला के 3 , खोरठा की 1, भोजपुरी की 3 तथा हिंदी की 6 फिल्में शामिल हैं 

कल्याणी शरण को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया 

 झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के नए अध्यक्ष के रूप में कमाल खान की नियुक्ति की गई 

➦ 31 अक्टूबर, 2015 को मोबाइल ऐप का उद्घाटन सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा हैकथोंन(Hackthon) का आयोजन सरकारी विभागों के कार्यों को सुगम बनाने, नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने एवं नए प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया है  

➦ भारत नेट परियोजना भारत सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजना है  इस परियोजना का उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है 

➦ हिंसा पीड़ित  और प्रताड़ित महिलाओं के लिए "सखी केंद्र" वन स्टॉप सेंटर सहारा बनेगी। यह केंद्र द्वारा संचालित तीसरा सेंटर है। छत्तीसगढ़ एवं नोएडा के बाद झारखंड के रिनपास में यह सेंटर स्थापित किया जाएगा

 झारखण्ड - बिहार पुलिस और सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से सीमवर्ती जिलों के जंगलों एवं पहाड़ियों में जॉइंट ऑपरेशन "ऑपरेशन सफाया" नाम से चलाया है 

 टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने टाटा समूह की सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज के चेयरमैन पद पर इशात हुसैन को नियुक्त किया है 

 झारखंड एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष मधुकांता  पाठक को भारतीय एथलेटिक्स संघ का संयुक्त सचिव बनाया गया है 

➦ झारखंड एकमात्र राज्य है, जहां किसानों के लिए कृषि सिंगल विंडो की व्यवस्था की गई  

➦ बोकारो, जमशेदपुर, धनबाद तथा देवघर में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क और रांची और खरसावां में 'सिल्क पार्क' की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की गई है 

 राज्य के 07 ज़िलों यथा-साहिबगंज, गढ़वा, गोड्डा, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह एवं कोडरमा में राष्ट्रीय बागवानी मिशन कार्यक्रम संचालित है 

 शहरी क्षेत्रों में अवस्थित पार्कों के प्रबंधन एवं विकास हेतु राज्य स्तरीय समिति 'झाड़ पार्क' (Jharparks) का गठन किये जाने का प्रस्ताव है

➦ हजारीबाग स्थित शहीद निर्मल महतो झारपार्क कार्यक्रम में शामिल किया गया है

➦ राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला के होटवार, रांची स्थित परिसर में 'इन्वेस्टिगेशन ट्रेनिंग स्कूल' एवं चाकुलिया, मुसाबनी में कॉन्स्टेबल ट्रेनिंग स्कूल की स्थापना की जा रही हैं

➦ बरही, हजारीबाग में 'ग्रोथ कलस्टर' गोड्डा में 'हस्तकरघा कलेक्टर' और आदित्यपुर में 'इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर' की स्थापना की जा रही है

रांची के इटकी में 'मेडिको सिटी' तथा ब्रांबे में 'कैंसर अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर' की स्थापना का प्रावधान है

 नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद के सहयोग से डिजाइन इंस्टीट्यूट रांची की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की गई है

➦ संथाल परगना के विकास के लिए एसपियाडा (SPIADA) का गठन किया गया है इसका मुख्यालय देवघर के देवीपुर में प्रस्तावित है यहां एक भाग में 'प्लास्टिक पार्क' भी बनाया जाएगा 

➦ दुमका में नये तारामंडल तथा देवघर में मिनी तारामंडल की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की गई है 

 '108' इमरजेंसी मेडिकल एंबुलेंस सर्विस योजना राज्य में 2016 से प्रारंभ हुआ है 

 झारखंड सरकार द्वारा 30 अगस्त, 2016 को राज्य में लोक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लागू किया गया PFMS  को लागू करने वाला देश का प्रथम राज्य है

 31 अक्टूबर, 2016 को गोवा सरकार और झारखंड सरकार के बीच पर्यटन के क्षेत्र में एम. ओ.यू. हुआ है

 मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 2017 को महिला उद्यमी वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है 

➦ राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 10 अप्रैल, 2016 को राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रोत्साहन हेतु राज्य के विभिन्न विभागों के रोजगार में 2% आरक्षण देने की घोषणा की है 

➦ झारखंड सरकार ने निगरानी ब्यूरो का नाम बदलकर "भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो" कर दिया है

 मुख्यमंत्री खाद्य सुरक्षा योजना के तहत आदिम जनजाति के सभी परिवारों को प्रतिमाह 35 किलोग्राम खाद्यान्न निशुल्क देने का प्रावधान किया गया है 

➦ रांची में मैप प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की जा रहे हैं

विश्व बैंक संपोषित 'नीर निर्मल परियोजना' अंतर्गत झारखंड भारतवर्ष में सबसे अधिक ग्रामीण जलापूर्ति योजना पूरा करने वाला प्रथम राज्य है 

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Friday, July 2, 2021

Jharkhand Audyogik Niti-2012 (झारखंड औद्योगिक नीति -2012)

Jharkhand Audyogik Niti-2012

➧ झारखंड की दूसरी औद्योगिक नीति की घोषणा 2012 में की गई 

➧ यह नीति आगामी 5 वर्षों के लिए घोषित की गई थी 

प्रमुख उद्देश्य 

1. झारखंड को निवेश के लिए पसंदीदा स्थान बनाना 

2. सतत  औद्योगिक विकास करना

3. वृहद-सुक्ष्म-लघु उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल की स्थापना करना 

4. राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का अनुकूलतम दोहन करना 

झारखंड औद्योगिक नीति -2012

5. रोजगार प्रधान उद्योगों जैसे :- रेशम, हथकरघा, खादी ग्राम उद्योग को बढ़ावा देना

6. पर्यावरण की दृष्टि से प्रदूषण मुक्त उद्योगों को बढ़ावा देना जैसे :- पर्यटन, आईटी, बायोटेक्नोलॉजी आदि

7. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग जैसे :- बागवानी, फूलों की खेती को बढ़वा देना 

8. आर्थिक विकास लाभ में SC/ST लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना 

9. नवोनमेषि (Enovation) तकनीकी के विकास पर बल 

10. क्षेत्रीय विषमता समाप्त करना

11. कानून व्यवस्था में सुधार करना 

12. सरकारी कानून का सरलीकरण करना 

13.विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पीपीटी मोड(PPP MODE) को विकसित करना

14. निजी निवेश से कौशल विकास करना जैसे - इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, आईटीआई स्थानों की स्थापना

सफलता के लिए कार्ययोजना (Action Plan)

1. राज्य आधारभूत संरचना जैसे :- सड़क, बिजली, पानी आदि पर बल देगी 

2. निर्णय को सरल बनाने हेतु सिंगल विंडो सिस्टम (एकल खिड़की) की व्यवस्था करेगी (झारखंड सरकार द्वारा 2015 में इसे लागू किया गया तथा ऐसा करने वाला यह भारत का प्रथम राज्य बना) 

3. वित्तीय लाभ को युक्तियुक्त बनाना  

4. औद्योगिक विकास क्षेत्र, पार्क, जैसे आधारभूत संरचना का निर्माण करना

5. बीमार एवं रुग्ण इकाइयों की पहचान कर उनका संरक्षण करना 

6. मध्यम-लघु-सूक्ष्म उद्योगों  के लिए संकुल बनाना  

7. विस्थापन एवं पुनर्वास नीति, 2008 में सुधार करना 

सफलता हेतु महत्वपूर्ण प्रयास

➧ सरकार जिला स्तर पर भूमि बैंक बनाएगी तथा 200-500 एकड़ जमीन अधिग्रहण करेगी, ताकि जिले में आधारभूत औद्योगिक संरचना खड़ी की जा सके

➧ सरकार कृषि भूमि के अधिग्रहण से परहेज करेंगी 

➧ भूमि बैंक का अधिकतर उद्योग सरकारी उद्यम के लिए होगी अतिरिक्त भूमि रहने पर निजी निवेशकों को भी दिया जाएगा

 सरकारी भूमि का हस्तांतरण 30 वर्ष के पट्टे पर होगी 

➧ लीज के नियम एवं शर्तों का निर्धारण राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग करेगा 

➧ 5 वर्ष के अंदर अगर निवेशक भूमि का उपयोग नहीं किए तो भूमि वापस ले ली जाएगी 

➧ सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए सीएनटी(CNT) और एसपीटी (SPT) एक्ट में संशोधन भी किया है 

इस संशोधन के अनुसार

(i) सरकार उद्योग एवं खनन के अलावे दूसरे विकास कार्यों के लिए भी CNT/SPT एक्ट के तहत आने वाले भूमि को अधिग्रहित कर सकेगी

(ii) सीएनटी/एसपीटी एक्ट के तहत आने वाले भूमि को मालिक, कृषि के अलावे उसपर व्यवसायिक उपयोग भी कर सकेगा तथा अपनी भूमि को रेंट पर दे सकेगा। हालांकि उसका मालिकाना हक़ उस पर सुरक्षित रहेगा 

स्थानीय खनिज उन उद्योगों को दिया जायेगा जो राज्य से संबंधित हो

➧ औद्योगिक इकाइयों के लिए नियम बनेगा की वे न्यूनतम जल का उपयोग करें या फिर तकनीक द्वारा जल का पुनर्चक्रण करें  

➧ सरकार ने कोडरमा - बहरागोड़ा एवं पतरातु - रांची - रामगढ़ औद्योगिक गलियारों को चिन्हित किया है  

➧ निजी  प्रोत्साहन से औद्योगिक पार्क के लिए भी प्रयास किया जा रहा है  

➧ आदित्यपुर में सरकार ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) खोल रही है  

➧ भूमि अधिग्रहण का कार्य करने तथा आधारभूत संरचना को खड़ा करने के लिए सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण आईआरडीए(IRDA) गठित किया है यह - 

(i) सड़क, पार्क, ड्रेनेज, तथा जलापूर्ति औद्योगिक क्षेत्र में बहाल करेगी 

(ii30 वर्ष के लिए भूमि देने तथा उसका नवीनीकरण करने का कार्य ही संस्था करेगी  

(iiiउपयुक्त मद में भूमि का उपयोग हुआ या नहीं जाँच करेगा  

(ivयह न्यूनतम 1000 एकड़ भूमि अधिग्रहित करेगा, जिसका 40% सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के लिए आरक्षित होगा। शेष  औद्योगिक क्षेत्र, पार्क बनाने में खर्च होगा  

(v) 10% भूमि उन लोगों के लिए आरक्षित रखेगा जो अपना भूमि खोये हुए हैं और शर्तों पर एक एकड़ में औद्योगिक इकाई खोलने के इच्छुक हैं, हालांकि निरीक्षण उपरांत भूमि आवंटन रद्द करने का अधिकार भी इसी संस्था के पास होगा  

(vi) सूक्ष्म एवं लघु उद्योग 2 वर्ष के अंतर्गत भूमि का उपयोग नहीं किये तो ऐसे में उसका आवंटन भी रद्द कर सकता है 

➧ उद्योगों के विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी स्किल डेवलपमेंट पर निर्भर करता है ऐसे में राज्य-

(i) 13 पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थापित किया है

(ii) 17 पॉलिटेक्निक कॉलेज का निर्माण कार्य जारी है

(iii) कई प्राइवेट संस्थानों को कॉलेज खोलने की अनुमति दी गई है 

(iv) रांची और दुमका में मिनी टूल रूम की स्थापना की गई है 

(v) प्राइवेट संस्थान को सरकार भूमि का 50% लागत ही देगी ऐसे संस्थानों में 25% सीट झारखंड के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध रहेगा

➧ ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए सरकार राज्य विद्युत नियामक आयोग बनाई है इसके अनुसार-

(i) राज्य में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत 552 किलोवाट प्रति घंटा है जिसे बढ़कर 800 किलोवाट प्रति घंटा करना है 2019 तक सभी गांव को विद्युतीकरण करना है

(ii) कुल ऊर्जा उत्पादन का 10% नवीकरणीय स्रोतों से विकसित करना है 

➧ राज्य सरकार ने झारखंड के खनिज संपदा की प्राप्ति तथा उद्योगों के आधार पर 8 क्षेत्रों में बांटा है:-

(1) पलामू, गढ़वा क्षेत्र :- लौह अयस्क, निक्षेप, डोलोमाइट, कोयला, चाइना कले  ग्रेनाइट ग्रेफाइट

(2) लोहरदगा-लातेहार क्षेत्र :- अल्युमिनियम उद्योग, ऊर्जा इकाई 

(3) राँची :- IT, Food Processing, मध्यम एवं वृहत उद्योग 

(4) कोडरमा-हजारीबाग क्षेत्र :- अभ्रक, ग्लास, ऊर्जा, सीमेंट, टेलीकॉम, इस्पात 

(5) धनबाद-बोकारो क्षेत्र  :- कोयला, इस्पात, ऊर्जा

(6) सिंहभूम (जमशेदपुर) सहित कोल्हान क्षेत्र :- सोना, IT, वन उत्पाद, सिल्क, Food Processing, टेक्सटाइल 

(7) घाटशिला क्षेत्र :- तांबा और वन 

(8) देवघर-जसीडीह एवं संथाल परगना क्षेत्र :- तेल मिल, ग्लास, स्टील, मेडिसिन, कोल ऊर्जा, सिल्क, कपड़ा

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