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Tuesday, July 6, 2021

Jharkhand Ki Aarthik Sthiti (झारखंड की आर्थिक स्थिति)

Jharkhand Ki Aarthik Sthiti

राज्य गठन से पूर्व झारखंड की आर्थिक स्थिति

➦ किसी भी राज्य की आर्थिक स्थिति उस राज्य में पाए जाने वाले संसाधनों पर निर्भर करती है। झारखंड संसाधनों से परिपूर्ण क्षेत्र है तथा यहां विकास की असीम संभावनाएं निहित है। 

➦ झारखंड मुख्य रूप से आदिवासी राज्य के रूप में चिन्हित राज्य है और जनजातीय समुदाय संपूर्ण भारत में पिछड़ेपन के लिए प्रसिद्ध है झारखंड के आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन भी इसी संदर्भ में किया जा सकता है।  

झारखंड की आर्थिक स्थिति

➦ 
किसी भी राज्य में आर्थिक स्थिति का आंकलन आर्थिक विकास के नाम से संबोधित किया जाता है तथा इसे व्यापक रूप से समग्र विकास या समृद्धि का नाम दिया जाता है। 

 झारखंड के झारखंड के 'आर्थिक विकास' के अंतर्गत आर्थिक क्रियाकलापों जैसे :-
(i) कृषि एवं कृषि संबंधित क्षेत्र 
(ii) औद्योगिक क्षेत्र एवं
(iii) सेवा क्षेत्रों 
को शामिल किया जाता है। इन्हीं तीनों क्षेत्रों का विकास किसी राज्य या देश को आगे बढ़ाने में 'इंजन' का कार्य करती है।  

 झारखंड के आर्थिक विकास को गति प्रदान करने में इन तीनों क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है दूसरी और यहां खनिजों की विद्यमानता, सस्ते श्रमिकों और भौगोलिक दृष्टिकोण से उद्योगों के प्रति बेहतर स्थितियों ने आर्थिक विकास का माहौल तैयार किया है

➦ झारखंड के आर्थिक विकास को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है 

(i) 1947 से 2000 तक -- आजादी के पश्चात आर्थिक विकास 
(ii) 15 नवंबर, 2000 के बाद  - राज्य गठन के पश्चात आर्थिक विकास

(I) राज्य गठन से पूर्व झारखंड की आर्थिक स्थिति

 झारखंड शुरू से ही खनिज संसाधनों से युक्त प्रदेश था। अतः इस क्षेत्र में उद्योग स्थापना के लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद थी। अतः केंद्र एवं संयुक्त विहार की सरकार ने इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जैसे:-
(i) टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी    -  190(जमशेदपुर)
(ii) हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड         -   1924 (घाटशिला)
(iii) इंडियन एलुमिनियम कंपनी     -  1938 (मुरी)
(iv) दामोदर नदी-घाटी परियोजना   -  1948 
(v) सिंदरी में रासायनिक कारखाना  -  1951 (धनबाद)
(vi) हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन   -  1958 (रांची)
(vii) बोकारो स्टील प्लांट                -   1964 (बोकारो)
(ix) यूरेनियम प्रोसेसिंग प्लांट         -   1967 (जादूगोड़ा)
(x) सीमेंट फैक्ट्री                            -   1921 (जपला)

 याद रहे की आजादी के पहले से ही ब्रिटिश काल में झारखंड की पहचान औद्योगिक क्षेत्र के रूप में के रूप में हो चुकी थी और इस दिशा में कई कंपनियां पहले से ही स्थापित हो चुकी थी

 राज्य गठन से पहले और आजादी के बाद झारखंड में कुछ सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे जैसे :- 
(i) 1960     -   रांची यूनिवर्सिटी की स्थापना
(ii) 1980    -   बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना
(iii) 1992   -   विनोबा भावे विश्वविद्यालय का गठन किया गया
(v) 1955    -   बिरसा इंस्टिट्यूट  ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना
(vi) 1926   -    इंडियन स्कूल ऑफ माइंस की स्थापना 
(vii) 1925  -   रिनपास की स्थापना
(viii) 1950 -   रिम्स (रांची आर्युविज्ञान संस्थान) आदि की स्थापना 

➦ उपरोक्त सराहनीय पहल के बावजूद झारखंड आर्थिक विकास के मोर्चे पर बेहद पिछड़ा हुआ राज्य था। कई अर्थशास्त्री तो छोटानागपुर क्षेत्र को बिहार का उपनिवेश कह कर संबोधित करते थे औद्योगिक गतिविधियां झारखंड में आदिवासियों के जीवन में विकास का अग्रदूत न बन कर उनके जीवन में कई प्रकार के चुनौतियों का विषय बन गई 

➦ आदिवासी समाज के प्रमुख समस्याएं  निम्न थी

(i) भूमि हस्तांतरण की समस्या  
(ii) बेरोजगारी एवं शिक्षा की समस्या 
(iii) वन दोहन की समस्या  
(iv) विस्थापन एवं पुनर्वास की समस्या  
(v) धर्मांतरण की समस्या   
(vi) मद्यपान एवं स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों की समस्या  
(vii) नक्सलियों का उत्पीड़न आदि  

➦ संभवत : इन्हीं समस्याओं ने पिछले 50 वर्षों से आदिवासी राज्य के रुप में झारखंड गठन की मांग को भी जिंदा रखा तथा आगे बढ़ाया  


(II) 15 नवंबर, 2000 के बाद राज्य का विकास 

➦ स्वतंत्र रूप से राज्य गठन के बाद झारखंड क्षेत्र को बिहार से अलग 46% भूमि प्राप्त हुई और राजस्व स्रोत का 67% हिस्सा प्राप्त हुआ  

➦ नवगठित राज्य झारखंड के पास राज्य गठन के समय से ही निम्न प्रमुख चुनौतियां विद्यमान थी  
(i) आर्थिक व्यवस्था में कृषि की प्रधानता 
(ii) दैध अर्थव्यवस्था का प्रतिरूप
(iii) बेरोजगारी दर उच्च होना 
(iv) प्रति व्यक्ति आय का निम्न होना
(v) अपर्याप्त बिजली सुविधा 
(vi) यातायात एवं संचार साधनों की कमी 
(vii) उग्रवादी गतिविधियां
(viii) अपर्याप्त सिंचाई व्यवस्था
(ix) अधिक जनसंख्या का दबाव 
(x) निम्न तकनीक का स्तर 
(xi) गरीबी का दर उच्च होना 
(xii) सेवा क्षेत्र का पिछड़ापन 

➦ राज्य के गठन के पश्चात इन चुनौतियों के समाधान हेतु राज्य सरकार द्वारा निरंतर कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए, जो राज्य के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं जैसे :-
(i) औद्योगिक विकास हेतु 2001, 2011, 2016 में औद्योगिक नीति की घोषणा 

(ii) राज्य में विद्युत आपूर्ति हेतु 2001 में राज्य विद्युत बोर्ड का गठन किया गया 

(iii) तीव्र परिवहन साधनों के विस्तार हेतु राज्य राजमार्गों का विकास 

(iv) 6 नए जिलों का निर्माण एवं आवश्यकता अनुसार प्रमंडल, अनुमंडल एवं प्रखंडों का व्यक्ति विकेंद्रीय करण 

(v) पेसा कानून के तहत प्रत्येक 5 वर्ष पर पंचायत एवं नगर निगम का चुनाव कराना 


(vii) मेक इन इंडिया के तर्ज पर 'मेक इन झारखंड' कार्यक्रम को बढ़ावा 

(viii) वर्तमान सरकार का लक्ष्य 2025 तक झारखंड को "स्टील हब ऑफ इंडिया" बनाने का है और उत्पादन क्षमता को 25 मिलियन टन  ले जाने का लक्ष्य रखा है

(ix) सरकार द्वारा 2016 में औद्योगिक नीति को व्यापक था प्रदान की गई, जिसके तहत निर्यात प्रोत्साहन,  फिल्म सिटी, पर्यटन विकास, फूड प्रसंस्करण, औद्योगिक पार्क आदि का विकास किया जाना है 

(x) सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े कदमों को उठाते हुए देवघर में (AIIMS) ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस) की स्थापना की गई है

(xi) बरही में औद्योगिक कलस्टर का निर्माण किया जा रहा है 

(xii) सरकार द्वारा जनजातियों के विकास एवं उन्हें प्रोत्साहन हेतु 'स्टार्ट-अप' स्टैंड-अप हब कार्यक्रम चलाए गए, जो उन्हें रोजगार जो उन्हें रोजगारोन्मुख बनाये हैं 

(xiii) राज्य में कैसे शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना - केंद्रीय विश्वविद्यालय, रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, नये विश्वविद्यालय के रूप में कोल्हान एवं मेदनीनगर में विश्वविद्यालय का निर्माण, मेडिकल कॉलेज की स्थापना आदि 


                                                                       👉 Next Page:झारखंड सूचना प्रौद्योगिकी
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