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Monday, April 19, 2021

Jharkhand Vastra Paridhan Aur Futviyar Niti-2016 (झारखंड वस्त्र, परिधान और फुटवियर नीति- 2016)

(Jharkhand Vastra Paridhan Aur FutviyarNiti-2016)



➤झारखंड में उद्योग एवं प्रोत्साहन नीति-2016 में टेक्सटाइल क्षेत्र को झारखंड में एक विशेष क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है 

रेशम क्षेत्र में झारखंड में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की है तथा झारखंड देश में सर्वाधिक तसर रेशम उत्पादित  करने वाला राज्य है 

यहाँ देश के कुल तसर रेशम का लगभग 40% उत्पादित किया जाता है 

झारखंड राज्य में उत्पादित तसर रेशम अपने गुणवत्ता के कारण वैश्विक स्तर पर जाना जाता है तथा अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस जैसे विकसित देशों में इसकी बहुतायत में मांग है 

राज्य में रेशम के डिजाइन, प्रशिक्षण, उधमिता, विपणन व उत्पादन  को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा झारखंड सिल्क टेक्सटाइल एवं हैंडीक्राफ्ट विकास प्राधिकरण(झारक्राफ्ट ) का गठन वर्ष 2006 में किया गया था

इसके माध्यम से राज्य में लगभग दो लाख रेशम कीट पालकों, सूत कातने वाले लोगों, बुनकरों  एवं शिल्पकारों को रोजगार हेतु सहायता प्रदान किया जा रहा है

झारक्राफ्ट  द्वारा राज्य एवं देश के विभिन्न शहरों में 18 आउटलेट का संचालन भी किया जा रहा है।इसमें  कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद, रांची, दिल्ली, एवं मुंबई  प्रमुख है 

झारखंड रेशम उत्पादन के साथ-साथ सूती धागों व हैंडलूम वस्तुओं के उत्पादन में भी देश का अग्रणी राज्य है। इस परिप्रेक्ष्य में राज्य में कपास ऊन बुनाई, हैंडलूम कपड़ों की बुनाई, ऊन और रेशमी धागा आदि को भी प्रोत्साहित करने हेतु गंभीर प्रयास किया जा रहा है

इस प्रकार की वस्तुओं के निर्माण की दृष्टि से रांची, लातेहार, पलामू, रामगढ़, धनबाद, बोकारो, गोड्डा  , पाकुड़ साहिबगंज और खूंटी प्रमुख जिले हैं 

राज्य में सरकार ने राजनगर  (सरायकेला-खरसावां )और इरबा (रांची) सिल्क पार्क तथा देवघर में मेगा टैक्सटाइल पार्क की स्थापना की है  साथ ही देवघर, दुमका, साहिबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा  जिले को भी भारत सरकार की ओर से मेगा हैंडलूम कलस्टर योजना में शामिल किया गया है  

झारखंड सरकार की वस्त्र, परिधान और फुटवियर नीति, 2016 के उद्देश्य निम्नवत है

1) समग्र टेक्सटाइ क्षेत्र में उच्च एवं सतत वृद्धि दर प्राप्त करना

2) टेक्सटाइल क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला को मजबूती प्रदान करना

3) सहकारी क्षेत्र की कताई मिलों को बेहतरी हेतु प्रोत्साहित करना

4) विद्युतकरधा क्षेत्र के आधुनिकीकरण द्वारा उन्हें मजबूती प्रदान करना ताकि वे उत्तम कोटि के वस्त्रों का निर्माण कर सकें

5) टेक्सटाइल उत्पादन क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी का सदुपयोग करके उसकी गुणवत्ता, डिजाइन एवं विपणन को बढ़ावा देना

6) आयात को प्रतिस्थापित करना 

7) टेक्सटाइल उद्योगों के विनियमन संबंधी नियमों का उदारीकरण करना, ताकि इस क्षेत्र को अधिकाधिक प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जा सके

8) इस क्षेत्र में कुशल कामगारों का निर्माण करना तथा इस नीति के तहत 5,00,000 रोजगार सृजन करना


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Sunday, April 18, 2021

Jharkhand Automobile Ewam Auto Components Niti-2015 (झारखंड ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट नीति-2015)

Jharkhand Automobile Ewam Auto Components Niti-2015



➤भारत विश्व में दोपहिया वाहनों का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माण करने वाला देश है तथा झारखंड राज्य ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट के विनिर्माण की दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है।  

देश के अन्य शहरों के साथ-साथ झारखंड राज्य में जमशेदपुर- आदित्यपुर शहर ऑटो क्लस्टर के रूप में विकसित हुआ है। 

राज्य में ऑटो विनिर्माण की वृहद् संभावनाओं की दृष्टि से वर्ष 2015 में झारखंड ऑटोमोबाइल एवं ऑटो- कंपोनेंट नीति का निर्माण किया गया है।  

इस नीति के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

झारखंड राज्य को पूर्वी भारत में ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट के विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना। 

इस क्षेत्र में वर्ष 2020 तक अतिरिक्त 50,000 रोजगार अवसरों का सृजन करना।  

राज्य में मेगा ऑटो परियोजनाओं को आकर्षित करना, नये ऑटो क्लस्टर की व्यवस्था स्थापना करना तथा वर्तमान ऑटो क्लस्टर को मजबूत करना। 

राज्य में टीयर-1 , टीयर-2, एवं  टीयर-3 ऑटो कंपोनेंट की स्थापना हेतु विनिर्माताओं को प्रोत्साहित करना। 

वर्तमान में स्थापित और अवसंरचनाओं की खामियों की पहचान करना जो ऑटोमोबाइल एवं ऑटो- कंपोनेंट उद्योगों को प्रभावित करते हैं तथा इन कमियों को दूर करना 

राज्य में सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित कुशलता विकास को प्रोत्साहित करना


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Saturday, April 17, 2021

Jharkhand Kifayati Awash Niti-2016 (झारखंड किफायती आवासीय नीति - 2016)

Jharkhand Kifayati Awash Niti-2016


झारखंड किफायती आवासीय नीति - 2016


केंद्र सरकार की नीति (हाउसिंग फॉर ऑल) "Housing For All" के तहत इसकी शुरुआत 2016 में की गई 

इसका संचालन नगर विकास विभाग, झारखंड सरकार करता है

इस नीति के तहत शहर वासियों को ₹1200/-  प्रति Feet2  की दर से आवास मुहैया कराया जाएगा

इस योजना के तहत तीन लाख प्रति वार्षिक आय वाले अति  कमजोर वर्ग (Economic Weaker Section-EWS) को 300 Feet2 का तथा 3,00,000 से ₹6,00,000 रूपये वाले निम्न आय वर्ग (Low Income Group- LIG)  को 600  Feet2 आवास मुहैया कराया जाएगा 

प्राइवेट डेवलपर्स तथा PPP मोड पर विकसित की जाने वाली कॉलोनियों में भी EWS तथा LIG के लिए आवास आरक्षित होंगे

 प्राइवेट डेवलपर्स 4000 वर्ग मीटर की कॉलोनी में न्यूनतम 10% तथा 3000 वर्ग मीटर की कॉलोनी में न्यूनतम 15% आवास  अति कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित रखेंगे

 ➤PPP (पीपीपी) मोड पर विकसित होने वाले कॉलोनियों को सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी, परंतु उन्हें कुल भूमि के 65% हिस्से पर ही कॉलोनी का निर्माण करना होगा तथा निर्मित कॉलोनी में 50% हिस्सा EWS  वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा, शेष 35% जमीन पर बिल्डर व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स बना सकते हैं 

इस नीति के तहत 100 सदस्यों वाली को-ऑपरेटिव सोसाइटी अपने सदस्यों के लिए आवासीय कॉलोनी बना सकती है। 

सरकार इसके लिए अनुदानित मूल्य पर जमीन एवं दूसरी सुविधाएं प्रदान करेंगी।  

आवास खरीदने के लिए  EWS तथा LIG वर्ग को 6.5% ब्याज की दर पर 15 वर्ष  के अवधि के लिए ₹6,00,000 रूपये तक क़र्ज़ देने का प्रावधान भी है

निजी भागीदारी से होने वाले स्लम क्षेत्र के पुनर्वास में केंद्र ₹1,00,000  रूपये तक प्रति केंद्र की मदद देगा

व्यक्तिगत आवास के निर्माण के मामले में अनुदान मद में प्रति लाभुक केंद्र की ओर से डेढ़ लाख रुपये  तथा राज्य मद  से ₹75000 रूपये अनुदान दी जाएगी। 

लाभुकों के बीच आवासों का वितरण लाटरी के माध्यम से किया जाएगा

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Friday, April 16, 2021

Jharkhand Electronic Ewam Vinirman Niti-2016 (झारखंड इलेक्ट्रॉनिक एवं विनिर्माण नीति-2016)

Jharkhand Electronic Ewam Vinirman Niti -2016




➤झारखंड सरकार ने इस नीति की घोषणा 2016 में की
 

वर्तमान समय में यह क्षेत्र विश्व का सबसे तेजी से उभरता हुआ उद्योग है

वर्ष 2020 तक भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सामानों का निर्यात 80 बिलियन करने का लक्ष्य रखा है इसी को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार ने इस नीति की घोषणा की है 

नीति का उद्देश्य 

(I) राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मांग तथा आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए इस उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाना 

(II) अगले 10 वर्षों में न्यूनतम 50 ESDM इकाइयों का निर्माण करना 

(III) इस उद्योग की विनिर्माण हेतु कच्चे माल एवं उपकरण की आपूर्ति के लिए श्रृंखला का निर्माण करना

(IV) भारत सरकार के लक्ष्य 2020 तक 80 बिलियन निर्यात में झारखंड की भागीदारी कम से कम 2 मिलियन सुनिश्चित करना 

(V) बौद्धिक संपदा अधिकार एवं पैटर्न अधिकार के व्यापार एवं सुरक्षा को प्रोत्साहित करना 

(VI) इस उद्योग के लिए आवश्यक मानव संसाधन को प्रशिक्षित करना 

(VII) ग्रामीण क्षेत्र की आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त सामग्री का निर्माण करना

इस नीति को सफलतापूर्वक क्रियान्वित  करने हेतु सरकार ने निम्न  घोषणाएं की है :- 

1) राज्य सरकार रांची, जमशेदपुर और धनबाद में न्यूनतम 200 एकड़ भूमि पर तीन नए ESD नवाचार हब  बनाएगा 

2) जो कंपनियां स्थानीय कच्चा माल का प्रयोग करेगी ,उन्हें कई प्रकार के वित्तीय अनुदान दिए जाएंगे। निवेशकों को सरकार जरूरत के अनुसार भूमि उपलब्ध कराएगी 

3) सरकार सड़क, बिजली, पानी जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित करेंगी

सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान निम्नलिखित होंगे :- 

1) प्रत्येक इकाई की स्थापना पर कुल पूंजी लागत का अधिकतम 20% अनुदान दिया जाएगा

2) सभी ESDM इकाइयों को आयकर छूट 5 वर्ष तक दी गई है

3) ESDM इकाइयों को स्टाम्प कर, स्थांतरण कर एवं पंजीकरण कर में छूट दी जाएगी

4) आई.टी. इकाई  उद्योग विभाग के अंतर्गत पंजीकृत हो तो कच्चे माल की ढुलाई पर नहीं लिया जाएगा

5) रांची, जमशेदपुर तथा धनबाद के ESDM इकाई अगर विदेशों से कच्चा माल मंगाती है, तो वाणिज्य कर पर 50% सब्सिडी दी जाएगी

6) आई.टी. सेक्टर में निवेश प्रक्रिया तेज करने के लिए भी सिंगल विंडो सिस्टम डिवेलप किया गया है

सोलर पावर प्लांट को डिम्ड (Dind) इंडस्ट्री का दर्जा दिया गया है तथा इन इकाइयों को आरंभिक 10 वर्ष तक विद्युत कर से मुक्त रखा गया है

यदि आवासीय  उपभोक्ता और रूफटॉप सोलर तकनीक का प्रयोग करता है तो उन्हें वाणिज्यक कर से छूट प्रदान की जाएगी

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Wednesday, April 14, 2021

Jharkhand Kray Niti-2014 (झारखंड क्रय नीति 2014)

Jharkhand Kray Niti-2014

(झारखंड क्रय नीति, 2014)


➤प्रथम झारखंड क्रय नीति 2007-2012 तक लागू थी
। 

यह स्थानीय सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों  (MSES) को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई थी। 

झारखंड औद्योगिक नीति-2012 के पारा-18 में एक नई क्रय नीति का प्रावधान स्थानीय सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (MSEs) को सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया गया था।  

इसी आलोक में एक नई नीति की घोषणा 2014 में की गई।  

झारखंड क्रय नीति, 2014 का प्रमुख उद्देश्य

1- सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के विकास को प्रोत्साहित करना तथा इसके लिए राज्य सरकारों द्वारा लघु उत्पादों  का क्रय करना।  

2- राज्य के सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को प्रतिस्पर्धा बनाना  

झारखंड के नीति के अंतर्गत मुख्य प्रावधान

1- राज्य सरकार की विभाग संस्थाएं या अनुदान प्रदान एजेंसियां राज्य के MSE उत्पाद को खरीदेंगे

2- राजकीय विभाग एवं एजेंसी या ऐसी कंपनी जिसमें 50% सरकार की भागीदारी है अपने कुल क्रय का 20% राज्य के MSE Sector से 2 वर्ष तक खरीदारी करेगी।

3- सूक्ष्म एवं लघु उत्पादन इकाइयों में निर्धारित वार्षिक क्रय लक्ष्य में भी उपलब्ध 20% एस0 टी0 / एस0 सी0  के स्वामित्व वाली इकाइयों के लिए निर्धारित किया गया है

4- क्रय के लिए वस्तु एवं सेवाओ की एक सूची भी निर्धारित है, जिसमें कृषि औजार, स्टील फर्नीचर, सोलर लाइट, हैंड पंप उपकरण, स्टेशनरी, पेंट -मोमबत्ती, जैसी 30 सूचियाँ शामिल है 

5 -झारखंड के क्रय नीति का लाभ केवल उन कंपनियों को मिलेगा जो झारखंड के सीमा क्षेत्र में स्थित हो या जिनका कार्यालय झारखंड में हो इत्यादि

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Monday, April 12, 2021

Jharkhand Me Sthaniyata Niti 2016 (झारखंड में स्थानीयता नीति 2016)

Jharkhand Me Sthaniyata Niti 2016

(झारखंड में स्थानीयता नीति 2016)



झारखंड सरकार द्वारा 7 अप्रैल, 2016 को राज्य गठन के 15 वर्षों  बाद स्थानीयता नीति की घोषणा की गई है

इस नीति के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में अगले 10 वर्षों तक राज्य के तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पदों की सरकारी नौकरियां स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित कर दी गई है 

इस नीति के तहत वैसे भारतीय नागरिकों को झारखंड का स्थानीय निवासी माना जाएगा, जो निम्नलिखित में से किसी एक शर्त को पूरा करता हो :-  

1- झारखंड राज्य की भौगोलिक सीमा में निवास करता हो एवं स्वयं अथवा पूर्वजों के नाम सर्वे खतियान में दर्ज हो। भूमिहीन के मामले में उसकी पहचान संबंधित ग्राम सभा द्वारा की जाएगी, जो झारखंड में प्रचलित भाषा, संस्कृति एवं परंपरा पर आधारित होगी

2- किसी व्यापार, नियोजन एवं अन्य कारणों से झारखंड की भौगोलिक सीमा में विगत 30 वर्षों से अधिक अवधि से निवास करता हो एवं अचल संपत्ति अर्जित की हो या ऐसे व्यक्ति की पत्नी/पति/संतान हो एवं झारखंड में निवास करने की प्रतिबद्धता रखने का प्रतिज्ञान करता हो

3- झारखंड राज्य सरकार/ राज्य सरकार द्वारा संचालित/मान्यता प्राप्त संस्थानों, निगम आदि में नियुक्त एवं कार्यरत पदाधिकारी/कर्मचारी या उनकी पत्नी/संतान हो एवं झारखंड राज्य में निवास करने की प्रतिबद्धता रखने का प्रतिज्ञान करता हो

4 -भारत सरकार का पदाधिकारी/कर्मचारी जो झारखंड राज्य में कार्यरत हो या उनकी पत्नी/पति/संतान हो एवं झारखंड राज्य में निवास करने की प्रतिबद्धता का प्रतिज्ञान करता हो

5- झारखंड राज्य में किसी संवैधानिक या विधिक पदों पर नियुक्त व्यक्ति उनकी पत्नी/पति/संतान हों  एवं झारखंड राज्य में निवास करने की प्रतिबद्धता का प्रतिज्ञान करता हो

6- ऐसे व्यक्ति, जिनका जन्म झारखंड में हुआ हो तथा जिसने अपने मैट्रिकुलेशन अथवा समकक्ष स्तर तक की पूरी शिक्षा झारखंड स्थित मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्राप्त की हो एवं झारखंड राज्य में निवास करने की प्रतिबद्धता का प्रतिज्ञान करता हो

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Sunday, March 14, 2021

Jharkhand Audyogik Niti-2001 (झारखंड औद्योगिक नीति -2001)

Jharkhand Audyogik Niti-2001


झारखंड औद्योगिक नीति -2001
 
➤झारखंड सरकार ने औद्योगिक नीति, 2001 के तहत उद्यमियों को आकर्षक छूट, अनुदान एवं आर्थिक सहायता लाभ उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है

इसके अलावा सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों को और अधिक मजबूती प्रदान करना, उत्पादकता में वृद्धि, रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना, और राज्य के उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा प्राप्त करना आदि  निर्धारित किया गया

सरकार ने उद्योगों से संबंधित अनेक नीतिगत उपायों की घोषणा की,

जिन्हें निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता है :- 

राज्य के कृषि, खनन एवं मानव संसाधनों का सम्यक उपयोग

राज्य के आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने हेतु राज्य में अधिकतम पूंजी निवेश को बढ़ावा देना

➤थ्रस्ट जॉन एवं थ्रस्ट एरिया की पहचान करना

राज्य के औद्योगिक विकास को सुनिश्चित करने हेतु आधुनिकतम प्रौद्योगिकी तथा मूलभूत अधिसंरचना का विकास

राज्य के असंतुलित विकास को रोकने हेतु संतुलित क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता देना

राज्य में औद्योगिकीकरण की गति की तीव्रता प्रदान करने हेतु निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुनिश्चित करना

ऐसी सामग्री ,जिसमें अन्य राज्यों की अपेक्षा झारखंड बेहतर स्थिति में है, उसके निर्यात को प्रोत्साहित करना

राज्य के रुग्ण औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करना

प्रक्रियाओं को सरल करना तथा प्रशासनिक सुधार को सुनिश्चित करना, जिससे एक संवेदनशील एवं पारदर्शितापूर्ण शासन व्यवस्था स्थापित हो सके

अनुसूचित जाति, जनजाति, कमजोर वर्ग, विकलांग तथा महिलाओं की उन्नति एवं उन्हें उचित अवसर प्रदान करना

उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ावा देने हेतु अनुसंधान एवं उच्च प्रौद्योगिकी का उपयोग करना

व्यवसायी विकास संस्थान एवं अन्य विशेषीकृत संस्थानों के द्वारा व्यवसायी विकास पर अधिक जोर

रुग्ण उद्योगों की जांच एवं समय रहते उनको पुन: रुत्थान हेतु प्रयास एवं जिला स्तर पर सतत निगरानी हेतु व्यवस्था

पारंपरिक व्यवसायों की सघनता वाले क्षेत्रों की पहचान एवं उनके विकास के लिए प्रशिक्षण, उन्नत डिजाइन तथा प्रौद्योगिकीय  एवं विपणन सहयोग को सुनिश्चित करना तथा शिल्पकारों को विपणन सहयोग हेतु शिल्प ग्राम एवं शिल्प बाजार की स्थापना करना

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा फल, सब्जी, मसाले और अन्य बागवानी उत्पादों के विकास हेतु विशेष सुविधाएँ  एवं उद्योग हेतु अधिसंरचना मुहैया कराना

औद्योगिक पार्क का विशेषकृत क्रियाकलापों हेतु विकास तथा सूचना प्रौद्योगिकी, तसर/मलबरी ,इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, रसायन, जैव-तकनीक एवं जड़ी-बूटियां। इस हेतु ऊर्जा, जल, संचार, परिवहन सुविधाओं का विकास

लघु उर्जा उत्पादन इकाइयों पर जोर एवं निजी क्षेत्र के सहयोग से गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का विकास।

उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन करने वाले उद्योगों यथा-प्लास्टिक, जड़ी-बूटी, औषधि, चर्म , हैंडुलम ,हस्तशिल्प और खादी उद्योगों के विकास को प्रोत्साहन

निरीक्षण एवं मूल्यांकन तंत्र को संस्थागत बनाना

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Sunday, March 7, 2021

Jharkhand Single Window Clearance Act, 2015 (झारखंड सिंगल विंडो क्लीयरेंस एक्ट, 2015)

झारखंड सिंगल विंडो क्लीयरेंस एक्ट, 2015

(Jharkhand Single Window Clearance Act, 2015)


➤राज्य में औद्योगिक 
विकास को प्रोत्साहित करने हेतु वर्ष 2015 में झारखंड सिंगल विंडो क्लीयरेंस कानून को अधिनियमित किया गया है। 

उद्देश्य

औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन प्रदान करना।  

विभिन्न अनुज्ञप्तियों , तथा अनुमतियों तथा स्वीकृतियों को त्वरित एवं समयबद्ध  मंजूरी प्रदान करना 

नए निवेशों को सुगम एवं सरल बनाकर राज्य में निवेशोनुकूल माहौल तैयार करना।  

➤विनियामक ढांचे को सरल बनाना।   

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य 

अधिनियम के उद्देश्य को पूरा करने हेतु एक शासी निकाय का गठन किया जाएगा जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे।  

इस निकाय के अन्य सदस्य उद्योग मंत्री, वित्त मंत्री, राजस्व व भूमि सुधार मंत्री तथा मुख्य सचिव होंगे। 

उद्योग सचिव इस निकाय के सदस्य सचिव होंगे। 

शासी निकाय का मुख्य कार्य सिंगल विंडो मंजूरी  एवं उद्योग सरलीकरण हेतु राजनीति दिशा -निर्देश तय करना होगा।  

अधिनियम के तहत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा जिसका प्रमुख कार्य उद्योग सरलीकरण एवं एकल खिड़की मंजूरी हेतु एकल खिड़की मंजूरी समिति, एजेंसी, जिला स्तरीय नोडल एजेंसी एवं जिला कार्यकारिणी समिति के कार्यों का नियमित रूप से निरीक्षण, पर्यवेक्षण एवं समीक्षा करना होगा।  

उद्योग विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक एकल खिड़की मंजूरी समिति का गठन किया जाएगा जिसका प्रमुख कार्य किसी उद्यम स्थापना या उसके संचालन की शुरुआत हेतु मंजूरी प्रदान करना होगा। 

अधिनियम के प्रावधानों के तहत जिला के उपायुक्त की अध्यक्षता में एक जिला कार्यकारिणी समिति का गठन किया जाएगा जिसका प्रमुख कार्य नियमित रूप से जिला स्तरीय नोडल एजेंसी के कामकाज का अनुश्रवन, पर्यर्वेक्षण एवं समीक्षा करना होगा 

जिला स्तरीय नोडल एजेंसी जिले में निवेश प्रोत्साहन गतिविधियों में सहायता प्रदान करेगी। यह उद्यमियों को विविध मंजूरियों हेतु उचित मार्गदर्शन प्रदान करेगा 

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Saturday, March 6, 2021

Jharkhand Film Niti-2015 (झारखंड फिल्म नीति-2015)

झारखंड फिल्म नीति-2015 

Jharkhand Film Niti-2015



➤राज्य में फिल्म निर्माण को प्रोत्साहन देने, लोक कला को बढ़ावा देने तथा राज्य की लोक भाषाओं में फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में झारखंड फिल्म नीति को लागू किया गया है
। 

इस नीति के तहत राज्य में झारखंड फिल्म विकास निगम एवं राज-स्तरीय फिल्म विकास परिषद का गठन किया गया है। 

राज्य में 'राज्य फिल्म टेलीविजन संस्थान' के रूप में संगीत नाट्य अकादमी का विकास प्रस्तावित है।  

इस संस्था द्वारा राज्य में झारखंडी लोक संस्कृति पर आधारित फिल्म निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।  

राज्य में फिल्म सिटी का निर्माण किया तथा जाएगा तथा इसके लिए निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। 

साथ ही फिल्म सिटी के निर्माण हेतु औद्योगिक दरों पर सरकार द्वारा भूमि उपलब्ध कराया जाएगा।  

राज्य में फिल्म निर्माण से संबंधित अधिसंरचना के निर्माण हेतु आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया

जाएगा।   

फिल्म निर्माण से संबंधित उपकरणों को किराए पर उपलब्ध कराया जाएगा।   

राज्य में मल्टीप्लेक्स के निर्माण हेतु प्रथम वर्ष में  100%द्वितीय व तृतीय वर्ष में 75% तथा चतुर्थ एवं पंचम वर्ष में 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा

राज्य में छोटे सिनेमाघरों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ बंद सिनेमाघरों को पुनः शुरू किया जाएगा

सौर ऊर्जा संचालित सिनेमाघरों को कुछ निवेश की राशि के 50% के बराबर अनुदान दिया जाएगा 

राज्य के सिनेमाघरों द्वारा मनोरंजन कर के अतिरिक्त प्रति टिकट ₹6 तथा ₹3 का उपयोग एयर- कंडीशनर और अन्य सुविधाओं हेतु किया जा सकेगा 

राज्य में जिन फिल्मों की शूटिंग 50% हुई है, उन्हें 6 माह हेतु मनोरंजन कर में 50% की छूट प्रदान की जाएगी 

➤इसी प्रकार राज्य में 75% शूटिंग की गई फिल्मों को छह माह हेतु मनोरंजन कर में 75% तक की छूट प्रदान की जाएगी 

सिनेमाघरों में कैपिटव पावर प्लांट जरनेटर की स्थापना हेतु 3 वर्षों तक विद्युत कर में छूट प्रदान की जाएगी

राज्य में 75% निर्मित फिल्मों  हेतु वित्तपोषण का प्रावधान इस नीति में किया गया है

इस हेतु फिल्म विकास निधि का गठन किया गया है। इस निधि हेतु फिल्म टिकट पर ₹2 की अधिभार का प्रावधान किया गया है 

राज्य की क्षेत्रीय भाषा में निर्मित फिल्मों को 50% तथा हिंदी व अन्य भाषाओं की क्षेत्रीय फिल्मों को 25% तक अनुदान देने का प्रावधान इस नीति में किया गया है इसके लिए ₹10 करोड़ रूपये वार्षिक अनुदान की राशि का निर्धारण किया गया है 

राज्य में पर्यटन स्थल को विशेष रूप से प्रसारित करने वाली फिल्मों को ₹50 लाख रूपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा

राज्य में फिल्मोत्सव का आयोजन, पुरस्कारों का आयोजन, फिल्म सोसाइटी को मजबूती आदि के द्वारा जनसाधारण की फिल्मों को लोकप्रिय बनाने हेतु प्रयास किया जाएगा

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Jharkhand Audyogik Park Niti-2015 (झारखंड औद्योगिक पार्क नीति-2015)

झारखंड औद्योगिक पार्क नीति-2015

Jharkhand Audyogik Park Niti-2015



➤झारखंड राज्य के निवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य में औद्योगिक पार्क नीति, 2015 का निर्माण किया गया है
 

यह नीति अधिसूचना जारी करने के तारीख से अगले 5 वर्षों तक लागू रहेगी 

इस नीति में प्रावधान किया गया है कि छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट-1908  की धारा-49 के तहत औद्योगिक पार्क की स्थापना हेतु उपायुक्त द्वारा अनुमति प्रदान की जाएगी 

इस नीति के तहत राज्य में निजी क्षेत्र, संयुक्त उद्यम एवं निजी-सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से औद्योगिक पार्क की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इसका निर्माण 50 एकड़ भूमि पर किया जाएगा, जिसमें कम से कम 15 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जाएगी 

निजी क्षेत्र अथवा संयुक्त उद्यम (पीपीपी) में विशिष्ट औद्योगिक पार्क की स्थापना हेतु कम से कम 10 एकड़ भूमि तथा 5 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना किया जाना अनिवार्य है

निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्क की स्थापना हेतु भूमि की व्यवस्था स्वयं निजी क्षेत्र द्वारा की जाएगी परंतु यदि सरकार के पास की भूमि उपलब्ध है, तो सरकार द्वारा औद्योगिक पार्क हेतु निर्धारित कुल भूमि का अधिकतम 35% आवंटित किया जा सकता है 

इस भूमि का आवंटन कम से कम 30 वर्षों के लिए किया जाएगा 

निजी औद्योगिक पार्क हेतु आवंटित कुल भूमि का 60% औद्योगिक इकाइयों हेतु तथा 40% सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों की स्थापना हेतु आरक्षित होगा 

➤कुल आवंटित भूमि का 40% आधारभूत संरचना या हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना अनिवार्य होगा 

निजी औद्योगिक पार्क को आधारभूत संरचना निर्माण हेतु राज्य सरकार द्वारा कुल परियोजना लागत का 50% या अधिकतम ₹10 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी  

निजी औद्योगिक पार्क को आधारभूत संरचना निर्माण हेतु राज्य सरकार द्वारा कुल परियोजना लागत का इसी प्रकार विशिष्ट औद्योगिक पार्क हेतु कुल परियोजना लागत का 50% अथवा अधिकतम 7 करोड रूपये वित्तीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा

औद्योगिक पार्क हेतु दी जाने वाली वित्तीय सहायता की अधिकतम अवधि 10 वर्ष की होगी जिसका 5 वर्ष पर नवीकरण किया जाएगा

निजी औद्योगिक पार्क को अनुमोदित किए जाने की तिथि से 3 वर्ष के अंदर पूर्ण करना होगा। निर्धारित अवधि में औद्योगिक पार्क का निर्माण नहीं किए जाने पर अथवा नियमों को तोड़ने पर राज्य सरकार मंत्री परिषद की मंजूरी से राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक पार्क का अधिग्रहण कर लिया जाएगा

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Friday, March 5, 2021

Jharkhand Mady Nished Niti-2016 (झारखंड मद्य निषेध नीति-2016)

Jharkhand Mady Nished Niti-2016


शराब की सभी बोतलों पर अनिवार्य रूप से यह अंकित किया जायेगा कि 'मदिरापान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है'

21 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को शराब की बिक्री करना प्रतिबंधित कर दिया गया है 

राज्य में शराब के प्रचार व प्रसार को प्रतिबंधित कर दिया गया है

राज्य में 50% से अधिक अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या वाले अनुसूचित ग्राम पंचायतों में शराब की दुकान खोलना प्रतिबंधित कर दिया गया है

राज्य में पचवई की दुकानों की बंदोबस्ती नहीं की जाएगी तथा इसकी खुदरा बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया है केवल जनजातीय त्योहारों और सामाजिक कार्यक्रम के अवसरों पर सीमित मात्रा में  पचवई का निर्माण करना व उसे रखने की छूट होगी 

15 अगस्त, 26 जनवरी, गांधी जयंती, रामनवमी, दशहरा, होली,  ईद व मुहर्रम पर्व के अवसर पर राज्य में शुष्क दिवस घोषित है तथा इस दिन शराब की बिक्री प्रतिबंधित होगी 

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Thursday, March 4, 2021

Jharkhand Chara Prasanskaran Udyog Niti-2015 (झारखंड चारा प्रसंस्करण उद्योग नीति-2015)

झारखंड चारा प्रसंस्करण उद्योग नीति-2015

Jharkhand chara prasanskaran udyog niti-2015


➤झारखंड राज्य में पशुपालन के विकास की असीम संभावनाएं विद्यमान है, जिसमें मांस, डेयरी, सूअर पालन, बकरी पालन, कुकुट पालन और मत्स्य पालन शामिल है
। 


राज्य में पशुपालन के विकास की संभावनाओं के परिप्रेक्ष्य में ही झारखंड चारा प्रसंस्करण उद्योग नीति- 2015 का निर्माण किया गया है 

इस नीति का प्रमुख उद्देश्य राज्य में चारा उत्पादन संभावनाओं का दोहन करना है, कृषि उपउत्पादों की मांग में वृद्धि कर किसानों को भी इसका लाभ प्रदान किया जाएगा 

इस नीति का अन्य उद्देश्य चारा प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना हेतु राज्य में अनुकूल वातावरण का निर्माण करना, पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करना, तकनीकी उन्नयन,विपणन नेटवर्क  का विकास करना तथा अनुदान व् रियायत प्रदान करना है। 


इस नीति का प्रमुख प्रावधान इस इस प्रकार है 


सामान्य क्षेत्रों में प्लांट व संयंत्र व् तकनीकी सिविल कार्य की कुल लागत का 35% (अधिकतम ₹500 लाख रूपये) सहायता प्रदान किया जाएगा

➤एकीकृत जनजाति  विकास परियोजना क्षेत्र में सहायता की राशि 45 % (अधिकतम ₹500 लाख रूपये) तक होगी
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Tuesday, December 29, 2020

Jharkhand Ke Pramukh Patra Patrikaye (झारखंड के प्रमुख पत्र-पत्रिकाएं)

Jharkhand Ke Pramukh Patra Patrikaye

झारखंड के प्रमुख पत्र-पत्रिकाएं

घर बंधु:
1880 में  एनाट रॉड के संपादन में जर्मन मिशन रांची द्वारा ईसाईं दर्शन व समाचार के प्रचार के उद्देश्य से प्रकाशित

आर्यावर्त :- बालकृष्ण सहाय के संपादन में आर्य प्रतिनिधि सभा, रांची द्वारा झारखंड पर केंद्रित 1 अप्रैल 1898 से 11 नवंबर 1950 तक प्रकाशित


सोशल सर्जन :- 1918 में सुकुमार हलधर के संपादन में रांची से समाज सुधार, राष्ट्रीय स्वतंत्रता एवं समाचार के प्रसार के लिए आरंभ किया गया 

मैन  इन इंडिया :- 1929 में शरतचंद्र राय के संपादन में चर्च रोड रांची से मुंडा, उरांव ,खड़िया,असुर, बिरहोर आदि आदिवासी समुदायों के मानविकी अध्ययन पर प्रकाशित इसका प्रकाशन आज भी जारी है 

छोटानागपुर पत्रिका :- 1924 में  संपादक रामराज  शर्मा द्वारा अपर बाजार रांची से प्रकाशित  

इस पत्रिका में झारखंड की समस्याओं एवं आदिवासी भाषाओं में आदिवासी लेखकों द्वारा लिखे आलेखों को प्रमुखता दी गई

झारखंड :- बड़ाईक ईश्वरी प्रसाद सिंह के संपादन में गुमला से नवंबर 1937 में प्रकाशित झारखंड आंदोलन की भूमिका महत्वपूर्ण पत्रिका

सत्संग :- मुलत:ईसाई धर्म पत्रिका, 1937 से 1954 तक फादर पीटर शांति नवरंगी के संपादन में निकली, जिसमें छोटानागपुर का इतिहास धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ

आदिवासी पाक्षिक:-बंदीराम उरांव और जुलियस तिग्गा के संयुक्त संपादन में आदिवासी महासभा द्वारा प्रकाशित (जयपाल सिंह मुंडा के आदिवासी महासभा में प्रवेश के अवसर पर प्रकाशित)

आदिवासी सकाम :- जयपाल सिंह मुंडा के संपादन में प्रकाशित महासभा का मुख्य पत्र। हिंदी, बंगला और अंग्रेजी सहित सभी झारखंडी भाषाओं के आलेखों को इसमें प्रमुख स्थान मिला

अबुआ झारखंड :- 14 दिसंबर 1947 से इग्नेस कुजूर एवं आगे चलकर  इग्नेस बैक के संपादन में दासों  प्रेस ,पत्थरकुदवा, रांची से निकलना शुरू हुआ, जो 1950 से झारखंड पार्टी का मुख्यपत्र बन गया

आदिवासी :- पहले चार अंक नागपुरी में निकले बाद में यह हिंदी में प्रकाशित होने लगा, परंतु इसमें लगातार झारखंडी  भाषाओं की रचनाएँ  छपती रही

संपादक -राधाकृष्ण फिलहाल यह जनसंपर्क विभाग झारखंड सरकार की पत्रिका है (प्रकाशन वर्ष- 1947)

होड़ संवाद :- डोमन साहू समीर के संपादन में 1947 से निरंतर प्रकाशित संथाली भाषा साहित्य की पत्रिका 

संप्रति इसका संपादन बाबूलाल मुर्मू कर रहे हैं 

राष्ट्रीय भाषा :- झारखंड का प्रथम हिंदी दैनिक पत्र राष्ट्रीय भाषा का प्रकाशन 1950 में रांची से हुआ प्रकाशक- देवी प्रसाद मित्र, संपादक बटुक देव शर्मा 

जगर साड़ा :- सुशील कुमार बागे द्वारा 1953 में रांची से संपादित-प्रकाशित मुंडारी पत्रिका 

नागपुरी :- अप्रैल 1961 में प्रकाशित नागपुरी पत्रिका, संपादक जोगेंद्र नाथ तिवारी

धरैया गुइठ:-   ईसाई धर्म तथा सादरी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए आदिवासी स्टूडेंट शिलांग की ओर से 1961 में बाखला जेफ और जोंस क्रिकेटर के संपादन में इसका प्रकाशन हुआ

रांची एक्सप्रेस :- यह समाचार पत्र बलवीर दत्त के संपादन में पहले सप्ताहिक और बाद में दैनिक (अगस्त 1976 में) रूप में प्रकाशित, प्रकाशन वर्ष 15 अगस्त, 1963 

तितकी :-  1963 में बीएन ओहदार एवं झारपात के संपादन में खोरठा भाषा साहित्य की निरंतर प्रकाशित पत्रिका 

नागपुरी महिनवारी कागज :- नागपुरी भाषा परिषद रांची द्वारा 1964 में योगेंद्र नाथ तिवारी के संपादन में प्रकाशित

नागपुरिया समाचार :- नागपुरी भाषा की पत्रिका 1966 में स्थापना, संपादक लक्ष्मी नारायण थे 

झारखंड समाचार:- अबुआ झारखंड की तरह ही झारखंड आंदोलन की पत्रिका 9 जून, 1968 से, इग्नेस कुजूर के संपादन में प्रकाशित

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Monday, December 28, 2020

Jharkhand Ke Mele (झारखंड के मेले)

झारखंड के मेले

(Jharkhand Ke Mele)

झारखंड के मेले

➤झारखंड में मेलों का काफी महत्व है यहां प्राय: मेले किसी ना किसी पर्व या त्योहार के अवसर पर तीर्थ स्थानों पर लगते हैं
 

झारखंड के कुछ प्रमुख मेले निम्नांकित हैं

हिजला मेला

यह मेला दुमका के निकट मयूराक्षी नदी के किनारे लगता है

यह संथाल जनजाति का एक मुख्य ऐतिहासिक मेला है 

बसंत ऋतु के कदमों की आहट के साथ शुरू होने वाला यह मेला 1 सप्ताह तक चलता है

संथाल परगना के तत्कालीन अंग्रेज उपायुक्त कास्टेयर्स ने 1890 ईसवी में इस मेले की शुरुआत की थी

हिजला शब्द 'हिजलोपाइट' नामक खनिज का संक्षिप्त  रूप है ,जो संथाल परगना की पहाड़ियों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है 

श्रावणी मेला

प्रत्येक वर्ष श्रावण महीने में देवघर में लगने वाला यह मेला विश्व का सबसे बड़ा मानव मेला है

प्रतिवर्ष श्रावण माह प्रारंभ होते ही 1 माह तक यहां भारत से ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों से भी शिव भक्त जल चढ़ाने आते हैं

विश्व का एकमात्र ऐसा मेला है जहां सभी एक ही रंग के वस्त्र पहन कर आते हैं

रथ यात्रा मेला 

रांची शहर में स्थित स्वामी जगन्नाथ का ऐतिहासिक मंदिर है 

प्रतिवर्ष यहां आषाढ़ शुल्क द्वितीय को रथयात्रा व एकादशी को धुरती रथयात्रा मेला लगता है

नरसिंह स्थान मेला 

हजारीबाग से करीब 5 किलोमीटर दक्षिण में लगने वाला नरसिंह स्थान मेला के नाम से प्रसिद्ध यह मेला एक बहुआयामी मेला है

यहां मेला कार्तिक पूर्णिमा को लगता है

यह ईश-दर्शन भी है, पिकनिक भी है, मनोरंजन भी है, प्रदर्शन भी है और मिलन-संपर्क का भी अवसर भी  है 

यह मेला मुख्यत: शहरी मेला माना जाता है, क्योंकि इस मेले में इस मेले में प्रया: शहर की स्त्री-पुरुष युवा वर्ग के एवं बच्चों की उपस्थिति अधिक रहती है

रामरेखा धाम मेला

सिमडेगा जिले में स्थित रामरेखा धाम में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर 3 दिनों का भव्य मेला लगता है 

➤किवदंती है कि भगवान श्रीराम ने दंडकारण्य जाने के क्रम में रामरेखा पहाड़ पर कुछ दिन बिताए थे  

इस मेले में झारखंड के अलावा मध्य प्रदेश, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से काफी संख्या में तीर्थ यात्रियों और दुकानदारों का आगमन होता है  

नवमी डोल मेला 

रांची के नजदीक टाटीसिल्वे में हर वर्ष होली के ठीक 9 दिन बाद एक बहुत बड़ा मेला लगता है 

यह मेला नवमी डोल मेला के नाम से प्रसिद्ध है  

यहां भगवान कृष्ण और राधा की प्रतिमाओं का पूजन किया जाता है  

धार्मिक परंपरा अनुसार राधा और कृष्ण की मूर्तियां को एक डोली में झुलाया जाता है 

झारखंड के आदिवासियों की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं का स्पष्ट रूप आज भी सैकड़ों वर्ष पुराने इस मेले में देखा जा सकता है 

सूर्य कुंड मेला  

हजारीबाग जिले के बरकट्ठा प्रखंड के बगोदर से 2. 5  किलोमीटर दूर सूर्यकुंड नामक स्थान पर मकर संक्रांति के दिन लगने वाला यह मेला 10 दिनों तक चलता है  

जिसे सूर्य कुंड मेला के नाम से जाना जाता है 

सूर्यकुंड की विशेषता है कि भारत के सभी गर्म जल स्रोतों में किस का तापमान सर्वाधिक है 

बढ़ई मेला  

देवघर जिला के दक्षिण-पश्चिम छोर पर बसे बुढ़ई ग्राम स्थित  बुढ़ई  पहाड़ पर सैकड़ों वर्षो से प्रत्येक वर्ष अगहन  माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मेला लगता है  

यह तिथि यहां नवान पर्व के रूप में मनाई जाती है 

नवान पर्व के अवसर पर नवान कर चुकाने के बाद लोग हजारों की तादाद में प्रसिद्ध बुढ़ई पहाड़ स्थित तालाब के पास बुढ़ेश्वरी देवी के मंदिर में जाते हैं। जहां 3 से 5 दिनों तक मेला लगता है 

गांधी मेला

प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस पर सिमडेगा जिले में 1 सप्ताह के लिए गांधी मेला लगता है

इस ऐतिहासिक मेले में विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी विभागों द्वारा सामूहिक रूप से एक मनमोहक प्रदर्शनी लगाई जाती है जिससे विकास मेला कहा जाता है 

मंडा मेला

प्रत्येक वर्ष वैशाख, जेष्ठ , एवं आषाढ़  महीने में हजारीबाग, बोकारो तथा रामगढ़ के आस-पास के गांव में आग पर चलने वाला यह पर्व मनाया जाता है

अंगारों की आग पर लोग नंगे पांव श्रद्धापूर्वक चलते हैं और अपनी साधना को सफल बनाते हैं 

जिस रात आग पर चला जाता है उस रात को जागरण कहा जाता है दूसरे दिन सुबह मंडा मेला लगता है

हथिमा पत्थर मेला 

बोकारो जिले के फुसरो  के निकट हाथी की आकृति वाला चट्टान है 

लोक आस्था की अभिव्यक्ति स्वरूप हर वर्ष मकर सक्रांति के अवसर पर यहां सामूहिक स्नान की परंपरा है इस कारण विशाल मेला लगता है

बिंदु धाम मेला

साहिबगंज से 55 किलोमीटर दूर स्थित बिंदुधाम शक्तिपीठ में प्रत्येक वर्ष चैत महीने में रामनवमी के दिन 1 सप्ताह का आकर्षक मेला लगता है 

यहां मां विंध्यवासिनी का 3 शक्तिपीठ है


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Thursday, December 10, 2020

Jharkhand Ke Khanij Sansadhan(झारखण्ड के खनिज संसाधन)

 Jharkhand Ke Khanij 


झारखण्ड के खनिज संसाधन

➤खनिज संसाधन की दृष्टि से  झारखण्ड भारत का सबसे आमिर राज्य है  

➤भारत में झारखंड एकमात्र ऐसा प्रदेश है, जहां इतने प्रकार के खनिज एक साथ एक ही क्षेत्र में पाए जाते हैं 

➤यही कारण है कि झारखंड की तुलना जर्मनी रुर घाटी से की जाती है एवं झारखंड को भारत का रूर प्रदेश कहा जाता है 

➤इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उपलब्ध खनिजों के संचित भंडार का लगभग 30 से 35% झारखंड की पठारी भाग में केंद्रित है 

पूरे भारत में जितने खनिजों का उत्पादन होता है उसका लगभग 40% झारखंड में होता है  

झारखंड क्षेत्र भारत का 95% पायराइट ,58% अभ्रक, 33% कोयला, 33% तांबा, 33% ग्रेफाइट, 32% बॉक्साइट, 30% कायनाइट एवं 19% लौह अयस्क उत्पादन करता है 

पायराइट अभ्रक, कोयला, तांबा,  ग्रेफाइट, बॉक्साइट, चीनी मिट्टी के उत्पादन में यह क्षेत्र भारत में प्रथम स्थान पर है तथा फास्फेट में द्वितीय, लौह अयस्क में पांचवें  एवं चूना पत्थर और मैग्नीज में सातवें स्थान पर है  

मूल्य की दृष्टि से भारत के कुल खनिजों के लगभग 32 % का हिस्सेदार झारखंड है  

झारखंड की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खनिज और उन पर आधारित उद्योग है 

झारखंड के खनिजों को तीन वर्गों में बांटा जाता है 

1-धात्विक खनिज 

2-अधात्विक खनिज और

3-ऊर्जा खनिज

1-धात्विक खनिज (Metallic Minerals)

धात्विक खनिज को दो उप वर्गों में बांटा जाता है

1-लौह धात्विक खनिज 

2-अलौह अधात्विक खनिज 
  
1-लौह धात्विक खनिज  का विवरण इस प्रकार है  

1 - लौह अयस्क :- झारखण्ड में लौह अयस्क का प्राप्ति क्षेत्र सिंहभूम जिला का दक्षिणी भाग है।

➤सिंहभूम के दक्षिणी भाग में लौह अयस्क की पेटी है जो 48 किलोमीटर लंबी पट्टी के रूप में उड़ीसा के मयूरभंज एवं क्योंझर तक विस्तृत है ,यह पट्टी विश्व के सबसे बड़े लौह भंडार के रूप में मानी जाती है।

➤सिंहभूम के दक्षिणी भाग में स्थित नोवामुंडी ,गुआ ,पानसिरा बुरु ,बादाम पहाड़ ,जामदा, गुरुमहिसानी,किरी बुरू आदि लोहे के प्रमुख खान है।

➤पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित नोवामुंडी की खान  एशिया की सबसे बड़ी  लोहे की खान है। इन खानों से उच्च कोटि का हेमेटाइट वर्ग का लौह अयस्क उत्पादित किया जाता है।

➤हेमेटाइट वर्ग के लौह अयस्क में लोहे के अंश 60% से 68 %तक होता है। 

➤झारखण्ड में उपलब्ध  लौह अयस्कों  में 99% भाग हेमेटाइट वर्ग का लौह अयस्कों का है। 

2 - मैंगनीज :- मैंगनीज का उपयोग इस्पात बनाने में एवं सुखी बैटरी और रसायन उद्योगों में होता है। 

➤झारखंड में मैंगनीज भंडार राज्य की आवश्यकता से बहुत कम है इसलिए राज्य को इसका आयात करना पड़ता है

➤यहां मैंगनीज के तीन प्रमुख क्षेत्र है :- गुवा से लिमटू, चाईबासा से बरजामुण्डा एवं बड़ा जामदा से नोवामुडी

➤कालेन्दा, बंसाडेरा, पन्सारीबुरु, एवं पहाड़पुर आदि मैगनीज की प्रमुख खान है

3-क्रोमाइट :- क्रोमाइट का उपयोग इस्पात बनाने में होता है। 

➤झारखंड में क्रोमाइट का मुख्य जमाव सिंहभूम  के जोजोहातू एवं सरायकेला क्षेत्राे  में है। 

➤यहाँ देश के कुल क्रोमाइट भंडार का लगभग 5.3 प्रतिशत भाग पाया जाता है

4 -जस्ता :- यह संथाल परगना, हजारीबाग, पलामू, रांची और सिंहभूम जिले में पाया जाता है। 

5 -टीन  :- यह हजारीबाग एवं रांची जिले में पाया जाता है


2 -लौह धात्विक खनिज  का विवरण इस प्रकार है 

1 - तांबा :- तांबा का उपयोग बिजली उपकरण, घरेलू बर्तन, धातु मिश्रण आदि में किया जाता है

➤इस खनिज के उत्पादन में झारखंड भारत का अग्रणी राज्य है

➤सिंहभूम के मुसाबनी, धोबनी, सुरादा, केन्दाडीह, पथरगोडा एवं घाटशिला में तांबे की खाने हैं

➤हजारीबाग एवं संथाल परगना के कुछ हिस्सों में भी तांबा मिलता है।

2 -बॉक्साइट :-बॉक्साइट से एलुमिनियम निकाला जाता है। 

➤इसके क्षेत्र है :- पलामू के आस-पास के पाट  क्षेत्र, रांची पठार, लोहरदगा के आस-पास का क्षेत्र, हजारीबाग और राजमहल का पहाड़ी क्षेत्र

➤यहां उच्च कोटि का बॉक्साइट पाया जाता है जिसमें 52% से 55% तक  एलुमिनियम होता है। 

3 -टंगस्टन :- इसका उपयोग बिजली उद्योग आदि में किया जाता है। यह हजारीबाग में पाया जाता है।

4 -वैनेडियम :- यह सिंहभूम के दुलपारा एवं दुबलावेटन  में पाया जाता है। 

5 -सोना :- स्वर्णरेखा नदी के बालू  को छानकर सोने के कण  प्राप्त किए जाते थे इसलिए नदी का नाम स्वर्ण रेखा नदी पड़ा।  

➤ये सोने के कण छोटा नागपुर के पठारों के अपक्षयण से आते थे जिसमें कोयले के प्राचीनतम भंडार है।

➤इसके क्षेत्र सिंहभूम  की  स्वर्ण रेखा नदी घाटी ,पलामू की सोन नदी की घाटी, हजारीबाग के दामोदर नदी की घाटी में थे। 

➤अब यह सोना उपलब्ध नहीं होता है लेकिन उपलब्धि के प्रमाण मिलते हैं। 

➤वर्तमान में करीब 350 किलोग्राम सोना का औसत उत्पादन हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के मऊ कॉपर प्लांट (घाटशिला) में प्रति वर्ष होता है जो तांबा अयस्क से उपउत्पाद के रूप में निकाला जाता है।

6 -चांदी :- चांदी हजारीबाग पलामू राज्य सिंहभूम आदि जिलों में मिलती है लेकिन अल्प मात्रा में और कच्चे में रूप में पाया जाता है

2-अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)

 
अधात्विक खनिजों का विवरण इस प्रकार है

1 - अभ्रख (MICA ):- इसका उपयोग बिजली के सामान, औषधि, शीशा, सजावटी सामान, अग्निरोधक  सामग्री, संचार संयंत्र आदि में किया जाता है

➤कोडरमा जिले में स्थित कोडरमा एवं झुमरी तलैया अभ्रक के प्रमुख क्षेत्र हैं। 

➤कोडरमा को भारत की अभ्रख राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। 

➤झारखंड में उच्च कोटि का सफेद अभ्रक मिलता है जिससे रूबी अभ्रख कहा जाता है। इसकी गुणवत्ता के कारण विश्व बाजार में इसकी अधिक मांग है। यही कारण है कि झारखंड के कुल उत्पादन का 90% भाग निर्यात किया जाता है। 

2 -काईनाइट (KYANITE):- यह ताप सहन करने वाला खनिज है। इसलिए इसका उपयोग ताप सहायता सामग्री के निर्माण में किया जाता है।  

➤लोहा गलाने की भट्टियों  में इसका स्तर दिया  जाता है।  

➤काईनाइट का सबसे बड़ा भंडार सिंहभूम क्षेत्र के लिप्साबुरु क्षेत्र में है। 

➤सिंहभूम के निकट राजखरसावां के निकट इसका उत्पादन भारतीय तांबा निगम द्वारा किया जाता है।
 
3 -ग्रेफाइट (GRAPHITE) :-यह कार्बन का एक रूप है जिससे काला सीसा भी कहा जाता है।  

➤इसका उपयोग उच्चतापसह्य  उद्योग में  उच्चतापसह्य  सामग्रियों के निर्माण में किया जाता है।  

➤यह  पलामू के बारेसनट , नारोमार ,कोजरूम और लाट क्षेत्र में मिलता है। 

4 -अग्नि मृतिका/ अग्निसह्य (FIRE CLAY) :- यह ताप की कुचालक होती है इसलिए इस मिट्टी से बनी  ईटो का उपयोग ताप भट्टियों  के निर्माण में किया जाता है

➤ यह दामोदर घाटी, पलामू, राँची  आदि स्थानों पर मिलती है

5 -चीनी मिट्टी (CHINA CLAY OR KAOLIN ) :- यह  मिट्टी फेल्सपार नामक खनिज के अपरदन के फल- स्वरुप बनाती है। 

➤ चीनी मिट्टी से बिजली के उपकरण, घरेलू बर्तन आदि बनाए जाते हैं। 

➤यह सिंहभूम, रांची ,धनबाद , हजारीबाग, संथाल परगना आदि  क्षेत्रों  में पाया जाता है।

6-चुना पत्थर (LIME STONE):-  इस से सीमेंट बनता है जिसका उपयोग इमारत बनाने में किया जाता है।इस्पात भट्टी में यह  कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त होता है। हजारीबाग, रांची, सिंहभूम  एवं पलामू  इसके प्रमुख क्षेत्र हैं।

7-डोलोमाइट (DOLAMITE):-  इसका उपयोग कागज, सीसा ,लौह- इस्पात, सीमेंट और गृह सामग्री के उद्योगों में होता है पलामू जिला का डाल्टेनगंज क्षेत्र इसका प्रमुख क्षेत्र है

8- एस्बेस्टस (ASBESTOS) :- इसका उपयोग छत बनाने एवं रासायनिक उद्योग में होता है यह रांची और सिंहभूम जिले में प्राप्त होता  प्राप्त होता है। 

9-सॉपस्टोन (SHOP STONE) :- इसका उपयोग पेंसिल, वार्निस  एवं पाउडर बनाने में होता है यह सिंहभूम एवं हजारीबाग में पाया जाता है

3-खनिज (Energy Minerals)

ऊर्जा खनिजों का विवरण इस प्रकार है

1- कोयला (COAL)


 कोयला(COAL) :- कोयला के मामले में झारखंड देश का अग्रणी राज्य है पूरे देश के उत्पादन का एक तिहाई उत्पादन यहां होता है।

झारखंड में कोयला उत्पादन के पांच प्रमुख क्षेत्र हैं

दामोदर घाटी कोयला क्षेत्र :- झरिया ,चंद्रपुर, रामगढ़, बोकारो ,कर्णपूरा आदि। 

बराकर बेसिन क्षेत्र :- हजारीबाग का इटखोरी, कुजू , और चोप,  गिरिडीह आदि। 

अजय बेसिन क्षेत्र :-  हजारीबाग जिला का जयंती, सहगौरी, कुंडित ,करैया इत्यादि। 

राजमहल पहाड़ी क्षेत्र :- ब्राह्मणी,  पंचवारा, छप्परविट्टा, गिलवाड़ी,हैना आदि। 

उत्तरी कोयल बेसिन क्षेत्र :- डाल्टेनगंज, हुटार, औरंगा नदी एवं अमानत नदी  क्षेत्र आदि। 

नोट :- 

1-दामोदर घाटी क्षेत्र राज्य के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 95% उत्पादित करता है। साथ ही यह कोकिंग कोल का शत-प्रतिशत उत्पादक क्षेत्र है।  

2- झारखंड में सर्वप्रथम कोयला खनन का काम दामोदर घाटी निगम क्षेत्र के अंतर्गत झरिया में शुरू हुआ। 

3-धनबाद जिले में स्थित झरिया भंडार एवं उत्पादन की दृष्टि से झारखंड का सर्वप्रथम कोयला केंद्र है।  झरिया  पूरे झारखंड के कोयला उत्पादन का 60% भाग उत्पादन करता है। झरिया कोयला क्षेत्र भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के अंतर्गत आता है। 

4- झरिया में उत्तम किस्म का कोकिंग कोल पाया जाता है। 

5- झरिया कोयला क्षेत्र में आग लगी हुई है और भीतर- ही -भीतर कोयला जलकर खाक हो रहा है।  

6- बोकारो, बोकारो जिला में स्थित है राऊरकेला का इस्पात कारखाना  यहीं से कोयला प्राप्त करता है। 

7- हजारीबाग, गिरिडीह ,रांची, चतरा, लातेहार एवं पलामू के कोयला क्षेत्र सेंट्रल कोकिंग कोल लिमिटेड के कमान के अंतर्गत आते हैं।  

➤झारखंड में उच्च कोटि का कोयला पाया जाता है। यहाँ बिटुमिनस और एन्थ्रासाइट दोनों ही उपयोगी प्रकार के कोयले उपलब्ध है। 

➤बिटुमिनस कोयले में 78 से 86% तक कार्बन का अंश होता है तथा इसका उपयोग घरेलू कार्यों में होता है। 

➤एन्थ्रासाइट कोयले में 94% से 98% तक कार्बन का अंश होता है। 

➤यह राज्य के आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। झारखंड को खनिजों से होने वाली कुल आय का 75% कोयले से प्राप्त होता है। 

झारखंड में उपलब्ध कोयले के तीन प्रकार है।

 1-कोकिंग
2-अर्द्ध कोकिंग और 
3-गैर-कोकिंग 

➤कोकिंग और अर्द्ध कोकिंग कोयले का उपयोग भारी उद्योगों में विशेषकर धात्विक उद्योगों में धोक भट्टी में होता है। 

➤गैर-कोकिंग कोयले का उपयोग स्पॉन्ज लोहा, ताप शक्ति, रेलवे, सीमेंट, खाद, ईट भट्टी, घरेलू इंधन आदि में होता है। 

➤कम लागत में अधिक उत्पादन के उद्देश्य से झारखंड के कोयला क्षेत्रों में परियोजना चलाई जा रही है।

सोवियत रूस की सहायता से चलने वाली दो  परियोजनाएं हैं :-

1 -झरिया क्षेत्र से कुमारी ओ0 सी0 पी0  कोयला क्षेत्र का विकास। 
2 - झरिया क्षेत्र के सीतानाला का विकास। 

वर्ल्ड बैंक की सहायता से चलने वाले 5 परियोजनाएं हैं 

1-झरिया कोकिंग कोयला परियोजना
2-रजरप्पा परियोजना
3-राजमहल परियोजना 
4-दामोदर परियोजना 
5-कतरास परियोजना 

2-यूरेनियम

➤यूरेनियम :- यह एक आण्विक खनिज है इसका विस्तार जादूगोड़ा, धालभूमगढ़, जुरमाडीह,नरवा ,बागजत, कन्यालूका,केरुवा डुमरी आदि क्षेत्रों में है। 

पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित जादूगोड़ा की यूरेनियम खदान से खुदाई यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया की देख रेख में होता है।

3-थोरियम 

➤थोरियम :- यह एक आण्विक खनिज है इसका विस्तार रांची पठार और धनबाद में है। 

4-इल्मेनाईट

➤इल्मेनाईट :- यह एक आण्विक खनिज है इसका उपयोग अंतरिक्ष यान और अणुशक्ति वाले अंत:यान में काम आने वाले धातु टाइटेनिक बनाने में होता है रांची जिला क्षेत्र में मिलता है।

 
  

 

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Wednesday, September 2, 2020

Jharkhand Ki Bhugarbhik Sanrachna (Geological Structure)

Jharkhand Ki Bhugarbhik Sanrachna

भूगर्भिक संरचना  (Geological Structure)




 झारखंड राज्य की भूगर्भिक संरचना (जियोलॉजिकल स्ट्रक्चर) में प्राचीनतम आर्कियान-कालीन चट्टानों 

से लेकर नवीनतम चतुर्थ कल्प कालीन जलोढ़ निक्षेपण तक पाए जाते हैं 

➤झारखण्ड क्षेत्र अति प्राचीन संरचना गोंडवाना भूखंड का उत्तरी -पूर्वी क्षेत्र है।

यह क्षेत्र एक भूगर्भिक काल में अनेक भूगर्भिक हलचलों और परिवर्तनों को देखते रहे हैं


झारखंड की भूगर्भिक संरचना का काल क्रमानुसार वितरण इस 

प्रकार है


आर्कियान ग्रेनाइट-नीस और धारवाड़ की चट्टानें 

 आर्कियान ग्रेनाइट -नीस एवं धारवाड़ की चट्टानें इन्हें पृथक पैतृक चट्टान कहा जाता है

जो झारखंड के लगभग 90% क्षेत्र में पाया जाता है

 ग्रेनाइट चट्टानें  कहीं-कहीं नीस में बदल गई है,आर्कियान काल से ही इस तरह की चट्टानें यहां है

 यह परत वालीचट्टानें पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम सरायकेला सिमडेगा एवं झारखंड के दक्षिण पूर्वी भाग में है

 ये चट्टानें आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है,क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में खनिज मिलते हैं


विध्वंस श्रेणी के चट्टानें

विध्वंस श्रेणी के चट्टानों इसमें बलुवा पत्थर या चुना पत्थर पाया जाता है

इसमें भी परत होती हैं, ऐसी चट्टानें गढ़वा जिले के उत्तरी भाग में है
 

गोंडवाना श्रेणी के चट्टानें 

गोंडवाना श्रेणी के चट्टानें दामोदर घाटी के तलछट से बनी इन चट्टानों में बलुवा पत्थर व कोयले की परतें होती है
 
जब भूखण्डों  का विचलन होता है तो उनके बीच की भूमि धस जाती है और घाटी का निर्माण होता है
 
उत्तरी कोयल की घाटी, गिरिडीह एवं राजमहल की पहाड़ियों में ऐसी चट्टानें मिलती हैं
 
झारखंड के प्रमुख कोयला निक्षेपों का निर्माण इसी श्रेणी के चट्टानों  से हुआ है


 
राजमहल ट्रैप और ढक्कन लावा की चट्टानें

राजमहल ट्रैप और ढक्कन  लावा के बहने से राजमहल ट्रैप बना तथा रुक-रुक कर दरारों से जो प्रवाह 

चला उसे ढक्कन लावा बना है
 
➤ये ही अपक्षयित होकर लेटराइट और बॉक्साइट बन गए
 
➤पाट  प्रदेश, साहिबगंज का उत्तर-पूर्वी भाग तथा पाकुड़ का पूर्वी भाग इसी जमाव का परिणाम है

पलामू, गढ़वा,लोहरदगा व गुमला को पाट प्रदेश कहते हैं, इसकी ऊंचाई 900 मीटर है

 

नवीनतम जलोढ़ निक्षेप

नवीनतम जलोढ़ निक्षेप  नदी घाटी क्षेत्रों में जलोढ़ निक्षेप से निर्मित संरचना पाई जाती हैं 

इस तरह की संरचना झारखंड के सीमित क्षेत्रों जैसे की राजमहल के पूर्वीभाग ,सोन घाटी, स्वर्ण रेखा की

 निचली घाटी में पाए जाते हैं
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