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Tuesday, March 2, 2021

Jharkhand Ki Vivah Padditi Aur Prakar (झारखंड की विवाह पद्धति और प्रकार)

झारखंड की विवाह पद्धति और प्रकार

(Jharkhand Ki Vivah Padditi Aur Prakar)



➤झारखंड की जनजातियां प्रया: अपने-अपने जातीय सीमाओं के अंदर ही विवाह करती हैं

समान गोत्र में विवाह करना वर्जित है, एवं यौन संबंधों पर सख्त पाबंदी है। 

जनजातीय परिवार प्राय: एक विवाही होता है, लेकिन विशेष स्थिति में दूसरी, तीसरी पत्नी रखने की मान्यता है

यहां की जनजातियों में विधवा विवाह मान्य है तथा तलाक का प्रचलन सभी में है

तलाक देने का अधिकार पति और पत्नी दोनों को होता है


तलाक के बाद औरत और मर्द दोनों अपनी इच्छा अनुसार शादी करने को स्वतंत्र होते हैं ऐसे विवाह को सगाई कहा जाता है  

झारखंड की जनजातियों में क्रय-विवाह, हठ -विवाह, सेवा-विवाह, विनिमय-विवाह, हरण-विवाह, पलायन-विवाह, राजी-खुशी, प्रेम विवाह, ढुकु विवाह जैसे कई तरीके प्रचलित है

जनजातीय विवाह प्रथाओं में दुडकी दिपिल बापला जैसे प्रथा भी प्रचलित है इसमें वर पक्ष कन्या को अपने घर बुलाकर शादी करता है

जनजातियों में प्रचलित प्रमुख विवाह 

विवाह                   जनजाति 
क्रय विवाह             संथाल, मुण्डा,हो ,उरांव,खड़िया ,बिरहोर 

सेवा विवाह            उरांव,मुण्डा,संथाल,बिरहोर 

विनिमय विवाह      प्रया: झारखण्ड के सभी जनजातियों में 

हठ विवाह              हो, बिरहोर 

विधवा विवाह         मुंडा, उरांव, संथाल  

हरण विवाह           उरांव,मुण्डा, हो, खड़िया, बिरहोर, सौरिया पहाड़िया  

(1) क्रय-विवाह  

क्रय विवाह: -  इसमें वधु को पाने के लिए वधू के माता-पिता या रिश्तेदारों को कुछ धन देना पड़ता है 

यह विवाह मुख्यतः मुंडा ,संथाल, हो,उरांव और खड़िया आदि जनजातियों में प्रचलित है 

➤संथालों  में क्रय विवाह को सादाई बापला कहा जाता है 

मुंडा जनजाति में क्रय विवाह में दिए जाने वाले कन्या-शुल्क  को कुरी गोनोंग कहा जाता है 

हो जनजाति क्रय विवाह को ही आंदि कहा जाता है 

खगड़िया जनजाति में इस विवाह को असली विवाह कहते है

बिरहोर जनजाति में इसे सदर बापला कहते है 

(2) सेवा-विवाह 

सेवा विवाह इसमें कन्या शुल्क न दे पाने की स्थिति में वर अपने होने वाले सास-ससुर की सेवा करता है, और बदले में उनकी बेटी से शादी का अधिकार पाता है

यह मुख्य रूप से उरांव ,संथाल और मुंडा जनजातियों में प्रचलित है

इस सेवा को संताली घरदी जावांय बापला कहते हैं 


(3) विनिमय-विवाह 

यह विवाह गुल्टा (गोलट) विवाह है  इस विवाह में एक भाई अपनी बहन की विवाह दूसरे परिवार के जिस लड़के से करता है, उसकी बहन से उसे खुद ही विवाह करना होता है इसे अदला-बदली विवाह भी कहते है 

➤यह झारखंड की प्रया: सभी जनजातियों में प्रचलित है

बिरहोर जनजाति में इस विवाह को गोलहट बापला कहते है 

➤संथाली जनजाति  के लोग इस विवाह को गोलाइटी बापला कहते है 

(4) हठ-विवाह 

➤इस विवाह में लड़की अपने प्रेमी के घर जबरन आकर रहने लगती है  

इस विवाह का प्रचलन हो और बिरहोर जनजातियों में अधिक है 

हो जनजाति में इस विवाह को अनादर विवाह कहा जाता है

बिरहोर जनजाति में इसे बोलो बापला कहा जाता है 

(5) हरण-विवाह 

इस विवाह में लड़की का अपहरण कर शादी की जाती है 

यह विवाह उरांव, मुंडा, हो ,खड़िया और बिरहोर जनजातियों में ज्यादा प्रचलित है 

➤सौरिया पहाड़िया में ज्यादातर हरण-विवाह होते हैं

(6) सह-पलायन विवाह

इस विवाह में युवक-युवती माता-पिता की अनुमति के बिना भागकर विवाह कर लेते हैं 

मुंडा, खड़िया, बिरहोर जनजातियों में इसका प्रचलन ज्यादा है 

(7) विधवा-विवाह 

मुंडा , उरांव ,संथाल जनजातियों में इस विवाह का प्रचलन ज्यादा है
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