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Saturday, September 12, 2020

Jharkhand Ki Janjatiya Shasan Vyavastha Part-2(Jharkhand Tribal Governance)

झारखंड की जनजातीय शासन व्यवस्था PART-2

(Jharkhand Tribal Governance)

नागवंशी शासन व्यवस्था


प्रथम शताब्दी 64 ईसवी में मुंडाओं  की राजव्यवस्था नागवंशियों को हस्तांतरित हुई है


Jharkhand Ki Janjatiya Shasan Vyavastha Part-2(Jharkhand Tribal Governance)

 नागवंशियों के प्रथम राजा फनी मुकुट राय ने पड़हा व्यवस्था को समाप्त नहीं किया ना ही कोई परिवर्तन किया, बल्कि इसे विस्तार देने का ही प्रयास किया।

 फनी मुकुट राय ने नागवंशी राज्य की स्थापना की  थी

फनी मुकुट राय पहला नागवंशी  राजा थे

फनी मुकुट राय के राज्य में  66 परगने थे 

नागवंशी राजा फनी मुकुट राय को नागवंश का आदिपुरुष माना जाता है

 सुतयाम्बे  को नागवंशी राजा फनी मुकुट राय ने अपनी राजधानी बनायी 

रांची स्थित  जगन्नाथ मंदिर  का  निर्माण नागवंशी शासक एनीशाह  1961 ईस्वी में बनवाया था 

 नागवंशियों के समय में भी पहले के जैसा कर व्यवस्था, भू -व्यवस्था और शासन व्यवस्था,मुण्डाओं की तरह  के चलते रहे

इस व्यवस्था में पहली शताब्दी से लेकर 16वें शताब्दी तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ 

लेकिन इस परंपरा में पहला  प्रभावकारी हस्तक्षेप मुगलों के आक्रमण काल से अर्थात 1585 ईस्वी से शुरू हुआ 

मुग़ल सेना यहां के राजाओं से नजराना लेने लगी और बाद में धीरे-धीरे एक नियमित रूप धारण कर लिया,जिसे मालगुजारी कहा जाने लगा  

नागवंशी काल व्यवस्था में कर या मालगुजारी लेने की प्रथा साधारण बात नहीं थी  उस समय नागवंशी राजाओ को पुरे राज्य की मालगुजारी देना असंभव होने लगा 

1616 ईस्वी में कर नहीं  दे पाने के कारण छोटानागपुर ख़ास के महाराजा दुर्जनसाल को कैद कर ग्वालियर के किले में 12 वर्षों तक जहांगीर द्वारा रखा गया था 

 ₹6000 रूपये सालाना कर देने की सहमति के आधार पर दुर्जनसाल को कैद से आजाद किया गया 

 नागवंशी राजाओं पर कर बढ़ता चला गया, लेकिन यहाँ प्रजा से कर लेने का रिवाज़ नहीं था। 

लेकिन लगातार बढ़ते कर को देखकर नागवंशी राजाओं ने अपने व्यवस्था को बदलकर लोगों से कर लेना शुरू कर दिया।  

 नागवंशी राजाओं ने पड़हा  के प्रमुख मानकियों  को भुईहर कहा गया और मालगुजारी वसूल करने का आदेश दिया गया।   

समय के साथ में राजाओं ने अपने अलग जागीदार रखे और उसे मालगुजारी वसूलने के लिए प्राधिकृत   किया।   

 इससे भुईंहरों की स्थिति और भी दयनीय हो गई।  जागीरदार कर बसूलता था किंतु कर नियमित रूप से नहीं दिया जाता था, यह तभी दिया जाता था,जब कोई मुगल बादशाह मांग करता था 

इस अनियमित कर व्यवस्था को नजराना या पेशकश  कहा जाता था।  

अंग्रेजों का आगमन मुगलों के बाद 1765 में दीवानी मिलने के बाद हुआ।  

अंग्रेजों का आगमन के साथ ही  इस क्षेत्र को पटना काउंसिल की व्यवस्था में फोर्ट विलियम के अधीन रखा

 इस क्षेत्र को 1773 ईस्वी तक कोई नियमित कर नहीं मिला 

तब नागपुर खास के लिए एस0 जी0 हृटली को प्रथम सिविल कलेक्टर नियुक्त किया गया, परन्तु  इससे भी कर संग्रहण में सफलता नहीं मिली 

अंग्रेजों ने क र वसूलने की कई और तरीके अपनाए फिर भी उन्हें पूर्ण सफलता नहीं मिली। 

कर नियमित वसूली के लिए 1973 ईस्वी में स्थायी बंदोबस्ती के बहाने राजा  महाराजाओं को जमींदार  दिया  गया  

इस समय एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ था जागीरदारी प्रथा जमींदारी प्रथा में बदल गया 

 इस व्यवस्था से प्राचीन काल से चली आ रही मुण्डाओं और नागवंशियों  की राज व्यवस्था समाप्त हो गए  

इसके बाद अंग्रेजों की विधि व्यवस्था की शुरुआत होती है।  

राजा-महाराजा अंग्रेजों  के लिए कर वसूलने वाले मात्रा रह गए थे ।  

नए कानूनों एवं नियम आने लगे जिसमें यहां के राजा-महाराजा,मुंडा मानकी ,पड़हा पंचायत समाप्त हो गए।   

पुरे  देश के साथ-साथ छोटानागपुर अंग्रेजों के अधीन हो गया और नागवंशी राजाओं की राज व्यवस्था खत्म हो गई। 

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