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Wednesday, December 30, 2020

Jharkhand Ki Bhasha Aur Boli(झारखण्ड की भाषा और बोली)

Jharkhand Ki Bhasha Aur Boli

झारखण्ड की भाषा और बोली

➤भाषा और बोली के बीच विभाजन की रेखा बहुत ही पतली होती है

भाषा का क्षेत्र विस्तृत होता है, जिसमें साहित्यिक रचनाएं होती है

जबकि बोली का क्षेत्र छोटा होता है इसमें साहित्यिक रचनाएं नहीं होती

भाषा के आधार पर झारखंड की भाषाओं एवं बोलियों  को 3 वर्गों में बांटा जा सकता है

1) मुंडारी भाषा (आस्ट्रो एशियाटिक) परिवार

2) द्रविढ़ (द्रविड़ियन) भाषा परिवार और

3) इंडो-आर्यन भाषा परिवार

1) मुंडारी भाषा (आस्ट्रो एशियाटिक) परिवार

इस भाषा परिवार में संताली, मुंडारी, हो, खड़िया, करमाली, भूमिज,  महाली, बिरजिया, असुरी, कोरबा आदि भाषाएं शामिल है 

मुंडा भाषा परिवार की ये  बोलियां रांची,सिंहभूम , हजारीबाग आदि क्षेत्र में यहां की जनजातियां द्वारा बोली जाती है

 संथाली भाषा को होड़ -रोड़ अर्थात होड़  लोगों की बोली भी कहा जाता है 

➤यह भाषा संख्या की दृस्टि से झारखण्ड में बोली जाने वाली द्वितीय भाषा है 

➤42 वें संविधान संशोधन 2003 के द्वारा सविंधान की आठवीं अनुसूची में इस भाषा को स्थान दिया गया है 

➤यह भाषा सविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान पाने वाली  झारखंड की एकमात्र क्षेत्रीय भाषा है 

इसके दो रूप मिलते हैं:- शुद्ध संथाली एवं मिश्रित संथाली 

मिश्रित संथाली में बांग्ला, उड़िया, मैथिली आदि का मिश्रण मिलता है

मुंडारी :- मुंडा जनजाति की भाषा का नाम मुण्डारी है ,जिसके चार रूप मिलते हैं 

➤खूटी और मुरहू क्षेत्र के पूर्वी अंचलों में बोली जाने वाली मुंडारी को हसद मुंडारी कहा जाता हैं 

➤तामड़ के आस-पास के क्षेत्र में बोली जाने वाली मुंडारी तमड़िया मुंडारी कहलाती है

➤केर मुण्डारी राँच के आस-पास के के क्षेत्रों में बोली जाने वाली मुंडारी भाषा है 

नागपुरी भाषा मिश्रित मुंडारी को नगूरी मुंडारी कहा जाता है

➤यह तोरपा,कर्रा ,कोलेबिरा  वानों आदि क्षेत्रों में बोली जाती हैं

हो :-यह हो जनजाति की भाषा का नाम है इस भाषा की अपनी शब्दावली एवं उच्चारण पद्धति है। अपने में ही सीमित रहने के कारण इस भाषा का विकास अधिक नहीं हो सका है 

खगड़िया :- खगड़िया जनजाति की भाषा का नाम खड़िया ही है

2) द्रविड़ (द्रविड़ियन) भाषा परिवार

इस भाषा परिवार में मुख्यतः कुड़ुख (उरांव ) ,मालतो (सौरिया , पहाड़िया, व माल पहाड़िया) आदि शामिल है 

➤द्रविड़ भाषा परिवार की कुड़ुख बोली उरांव जनजाति के लोगों में प्रचलित है इस भाषा ने बड़ी उदारता से अन्य भाषाओं के शब्दों को ग्रहण किया है

कुड़ुख भाषा का ही  एक अन्य रूप मालतो है

➤मालतो को सौरिया  पहाड़ियां,गोंडी  तथा माल पहाड़िया आदि जनजातियां बोलचाल के रूप में प्रयोग करती हैं 

3) इंडो-आर्यन भाषा परिवार

हिंदी, खोरठा, नागपुरी,कुड़माली, पंचपरगनिया,आदि इस भाषा परिवार में आती है। इसे सदानी भाषा भी कहते हैं

हिंदी :- झारखंड की सर्वप्रमुख भाषा हिंदी है इससे झारखंड की राजभाषा होने का गौरव प्राप्त है यहां हिंदी बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक है

खोरठा :- इसका  संबंध प्राचीनी खरोष्ठी लिपि से जोड़ा जाता है यह मागधी  प्राकृत से विकसित एक भाषा है 

➤यह हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, रांची जिले के उत्तरी भाग, संथाल परगना, एवं पलामू के उत्तर -पूर्वी भागों में बोली जाती है

इस भाषा के अंतर्गत रंगड़िया ,देसवाली, खटाही, खटाई,खोटहि और गोलवारी बोलियां आती है

पंचपरगनिया:- पंचपरगना क्षेत्र जिसके अन्तर्गत तमाड़ ,बुंडू ,राहे ,सोनाहातु और सिल्ली क्षेत्र आते हैं में प्रचलित भाषा पंच परगनिया कहलाती है 

कुड़माली :- मूल रूप से कुर्मी जाति की भाषा होने के कारण इसका नाम कुड़माली पड़ा 

यह रांची, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, सिंहभूम एवं संथाल परगना में बोली जाती है 

नागपुरी :- यह भी मागधी  प्राकृत  से विकसित एक भाषा है संपर्क भाषा के रूप में पूरे झारखंड में यह प्रचलित है 

इसे नागवंशी राजाओं की मातृभाषा होने का गौरव प्राप्त है इसे सादरी /गवारी  के नाम से भी जाना जाता है

इन भाषाओं के अतिरिक्त झारखंड में भोजपुरी, मैथिली,मगही ,अंगिका ,बांग्ला, उर्दू, उड़िया, जिप्सी,   आदि भाषाएं बोली जाती हैं 

➤राज्य के राँची तथा पलामू क्षेत्र के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भोजपुरी में बात-चीत करने वाले झारखंड- वासियों तथा बिहारियों की एक बड़ी संख्या विद्यमान है

झारखंड राज्य में प्रचलित भोजपुरी को दो वर्गों में विभाजित किया गया है

1)आदर्श भोजपुरी :- यह मुख्यत: पलामू के कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है 

2) नागपुरिया, सादरी एवं सदानी, भोजपुरी :- इसका व्यवहार छोटानागपुर के गैर आदिवासी क्षेत्रों में होता है 

झारखंड राज्य के हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, पूर्वी पलामू, रांची एवं सिंहभूम  में बोल-चाल की भाषा के रूप में मगही का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है

भाषा विज्ञानी डॉ जॉर्ज ग्रियर्सन ने मगही बोली को दो श्रेणी में विभक्त किया है

1)आदर्श मगही :- यह मुख्य रूप से हजारीबाग एवं पूर्वी पलामू में बोली जाती है 

2) पूर्वी मगही :- यह रांची, हजारीबाग आदि क्षेत्रों में बोली जाती है 

रांची के कुछ क्षेत्रों में बोली जाने वाली पूर्वी मगही के रूप को पचपरगनिया भी कहा जाता है

अंगिका प्राचीन मैथिली का वर्तमान स्वरूप समझी जाने वाली भाषा है

यह मुख्यत: गोड्डा, दुमका, साहिबगंज, देवघर आदि क्षेत्रों में प्रचलित है छठी शताब्दी के ग्रंथ ललित विस्तार की रचना इसी भाषा में की गई थी

जिप्सी झारखंड में छिट-पुट बोली जाने वाली बोली है या नट, मलाट तथा गुलगुलिया जातियों की संपर्क बोली है

उर्दू को झारखंड के द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है

बांग्ला झारखंड राज्य की तीसरी जाने वाली भाषा हैउत्तरी 

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