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Monday, November 15, 2021

Jharkhand me Jal Pradushan Ke Karan Aur Prabhav (झारखंड में जल प्रदूषण के कारण और प्रभाव)

झारखंड में जल प्रदूषण के कारण और प्रभाव

➧ जल में घुलनशील अथवा अघुलनशील पदार्थों की मात्रा में वृद्धि के कारण जब जल की गुणवत्ता जैसे रंग, स्वाद आदि में परिवर्तन आता है, तो पृथ्वी पर पानी का प्रदूषित होना जल प्रदूषण कहलाता है

 जल प्रदूषण में जीवाणु, रसायन और कण  जैसे प्रदूषकों द्वारा जल का संदूषण किया जाता है, जो पानी की शुद्धता को कम करता है

झारखंड में जल प्रदूषण के कारण और प्रभाव

➧ जल प्रदूषण के कारण 

(i) मानव मल का नदियों, नहरों आदि में विसर्जन

(ii) सफाई तथा सीवर (मल-जल निकास पाइप) का उचित प्रबंधन का न होना

(iii) विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा अपने कचरे तथा गंदे पानी का नदियों तथा नहरों में विसर्जन करना 

(iv) कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले जहरीले रसायनों और खादों का पानी में घुलना

(v) नदियों में कूड़े-कचरे, मानव-शवों और पारंपरिक प्रथाओं का पालन करते हुए उपयोग में आने वाले प्रत्येक घरेलु सामग्री का समीप के जल स्रोत में विसर्जन

(vi) गंदे नालों, सीवरों के पानी का नदियों में छोड़ा जाना

(v) कच्चा पेट्रोल, कुओं से निकालते समय समुद्र में मिल जाता है, जिससे जल प्रदूषित होता है 

(vi) कुछ कीटनाशक पदार्थ जैसे डीडीटी, बीएचसी आदि के छिड़काव से जल प्रदूषित हो जाता है तथा समुद्री जानवरों एवं मछलियों आदि को हानि पहुंचाता है  अंततः खाद्य श्रृंखला को प्रभावित करते हैं 

 जल प्रदूषण के प्रभाव

(i) इससे मनुष्य,पशु तथा पक्षियों के स्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न होता है इससे टाइफाइड, पीलिया, हैजा, गैस्ट्रिक आदि बीमारियां पैदा होती हैं। 

(ii) इससे विभिन्न जीव तथा वनस्पति प्रजातियों को नुकसान पहुंचाता है

(iii) इससे पीने के पानी की कमी बढ़ती है, क्योंकि नदियों, नहरों यहां तक की जमीन के भीतर का पानी भी प्रदूषित हो जाता है

(iv) सूक्ष्म-जीव जल में घुले हुए ऑक्सीजन के एक बड़े भाग को अपने उपयोग के लिए अवशोषित कर लेते हैं जब जल में जैविक द्रव बहुत अधिक होते हैं तब जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिसके कारण जल में रहने वाले जीव-जंतुओ की मृत्यु हो जाती है

(v) प्रदूषित जल से खेतों में सिंचाई करने पर प्रदूषक तत्व पौधे में प्रवेश कर जाते हैं इन पौधों  अथवा इन के फलों को खाने से अनेक भयंकर बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं

(vi) मनुष्य द्वारा पृथ्वी का कूड़ा-कचरा समुद्र में डाला जा रहा है नदियाँ  भी अपना प्रदूषित जल समुद्र में मिलाकर उसे लगातार प्रदूषित कर रही है वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है, कि यदि भू-मध्य सागर में कूड़ा-कचरा समुद्र में डालना बंद न किया गया तो डॉल्फिन और टूना जैसे सुंदर मछलियों का यह सागर भी कब्रगाह बन जाएगा 

(vii) औद्योयोगिक प्रक्रियाओं से उत्पन्न रासायनिक पदार्थ प्रायः क्लोरीन, अमोनिया, हाइड्रोजन सल्फाइड, जस्ता निकिल एवं पारा आदि विषैले पदार्थों से युक्त होते हैं 

(viii) यदि जल पीने के माध्यम से अथवा इस जल में पलने वाली मछलियों को खाने के माध्यम से शरीर में पहुंच जाए तो गंभीर बीमारियों का कारण बन जाता है, जिसमें अंधापन, शरीर के अंगो का लकवा मार जाना और श्वसन क्रिया आदि का विकार शामिल है जब यह जल, कपड़ा धोने अथवा नहाने के लिए नियमित प्रयोग में लाया जाता है, तो त्वचा रोग उत्पन्न हो जाता है  

 झारखंड में जल प्रदूषण का प्रभाव 

➧ राज्य में जल प्रदूषण का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, क्योंकि औद्योगिक उत्पादन की उच्च क्षमता प्राप्त करना और जनसंख्या का संकेंद्रण विशिष्ट संसाधन प्राप्त क्षेत्रों में होना निरंतर बढ़ जा रहा है 

 झारखंड को मुख्यतः सतही जल प्रदूषण एवं भौम जल प्रदूषण दोनों ही रूप में जल प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है। चूकिं भौम  जल स्तर में प्रदूषण का मुख्य कारण खनन का अवैज्ञानिक तरीका है, इसका विशेष उदाहरण धनबाद का झरिया क्षेत्र  एवं स्वयं धनबाद शहर आदि हैं। 

➧ वहीं औद्योगिक निस्तारण ने दामोदर को राज्य की सबसे अधिक प्रदूषित नदी होने का दर्जा प्रदान किया है

➧ स्वर्णरेखा नदी भी जल प्रदूषण के चपेट में है, जबकि राज्य में कई नदियों को शहरी विकास ने अपने में समा लिया, जिससे पारितंत्र को नुकसान पहुंचा है। उदाहरण के लिए राँची का हरमू नदी, जो कभी मध्यम आकार की नदी थी, परंतु वर्तमान में यह शहरी बड़ी नालों में बदल चुकी है। 

➧ राज्य में पाट क्षेत्र  एवं रांची हजारीबाग पठार के किनारों के सहारे कई जल प्रपातों का निर्माण होता है, जो पर्यटन का मुख्य केंद्र है, परंतु पर्यटकों के द्वारा इन जलप्रपातों के आस-पास सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग करना, इन जल प्रपातों की आयु पर प्रश्न खड़ा कर सकता है अतः इस पर अवसंरचनात्मक रूप से कार्य करने की जरूरत है। 

➧ राज्य की नदियों में प्रदूषण की स्थिति

झारखण्ड में दामोदर नदी का प्रदुषण

 ➧ इस नदी के किनारे लगभग सभी प्रकार के प्रदूषण पैदा करने वाले उद्योग अवस्थित है। लगभग 130Mn लीटर औद्योगिक अपशिष्ट और 65 मिलियन लीटर अनुपचारित घरेलु मल-जल प्रतिदिन दामोदर नदी को प्रदूषित कर रही है। 

➧ दामोदर और उसकी सहायक नदियों में वर्तमान में बड़े पैमाने पर कचरों का जमाव किया जा रहा है, जो वर्षा के दिनों में फैलकर नदियों में आ जाता है। 

➧ फल स्वरुप नदियों का जल एवं भौम जल स्तर दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिस कारण निकटवर्ती गांवों व कस्बों पर जल संकट की समस्या सामने आ रही है। क्योंकि नलकूप एवं कुआँ के जल प्रदूषित होकर सूख जाते हैं। 

➧ दामोदर घाटी के कोयला में थोड़ी मात्रा में सल्फर एवं पायराइट की भी विद्यमान है। 

➧ दामोदर में लोहे की मात्रा में 1 से 6mg/1 है। यद्यपि यह बहुत अधिक नहीं है, किंतु परितंत्र  के लिए इनकी यह मात्रा पर मात्रा भी खतरनाक साबित होती है, क्योंकि जलीय जीव इससे समाप्त होते हैं एवं स्व नियमन की घटना में परिवर्तन आता है।  

➧ दामोदर नदी में मैग्नीज, क्रोमियम, शीशा, पारा, फ्लूराइट कैडमियम और तांबा आदि की मात्रा भी पाई जाती है, जो मुख्यतः इनकी सहायक नदियों की अवसादो के द्वारा लाई जाती है। 

➧ इन छोटे कणों के द्वारा मनुष्यों में कई बीमारियों को जन्म दिया जाता है, जिसमें कमजोरी, एनोरेक्सिया, दिल्पेप्सिया, मुंह में धातु का स्वाद, सर दर्द , हाई ब्लड प्रेशर और एनेमिया आदि मुख्य हैं। 

➧ दामोदर की अवसादो में कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी तथा पोटेशियम का संकेंद्रण है इन अवसादों में आर्सेनिक, पारा, शीशा, क्रोमियम, तांबा, जिंक, मैगनीज़, लोहा और टिटैनियम जैसे धातु भी मिलते हैं।  

झारखंड के दामोदर नदी के आस-पास रहने वाले लोग दामोदर का प्रदूषण से काफी प्रभावित है, दामोदर एवं इसकी सहायक नदियों के जल में प्रदूषण की मात्रा उच्च होने के कारण पेयजल के रूप में इन नदियों का प्रयोग लगभग समाप्त हो गया है।  

➧ स्वर्णरेखा नदी का प्रदूषण 

➧ स्वर्णरेखा नदी रांची नगर से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में नगड़ी गांव (रानी चुवा)  नामक स्थान से निकलती है

➧ यह लगभग 28,928 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपना बेसिन बनाती है इस नदी के किनारे भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक कंपनी टाटा इस्पात निगम लिमिटेड (टिस्को) बसा हुआ है 

➧ सर्वेक्षण में पाया गया कि नगड़ी से लेकर गालूडीह तक है यह नदी पांच स्थानों पर काफी प्रदूषित हो गई है, इसका कारण यह है:- 

क्षेत्र                                           प्रदूषण

(i) नगरी से हरीमा डैम                    दर्जनों चावल मिल

(ii) हरीमा डैम से गेतलसूद डैम       फैक्ट्री, रांची नगर की नालियाँ 

(iii) गेतलसूद डैम से चांडिल डैम     मुरी एल्युमीनियम कारखाना

(iv) चांडिल डैम से गालूडीह बराज   शहरी कचरा, उद्योग 

(v) गालूडीह बराज से आगे तक       शहरी कचरा, उद्योग

➧ स्वर्णरेखा नदी रांची से जमशेदपुर तक पहुंचते-पहुंचते लगभग सूख जाती है जमशेदपुर शहर में मानगो पुल से नदी जल के गुजरने के दौरान बदबू साफ महसूस किया जाता है, क्योंकि यहां जल के सड़ने की क्रिया प्रारंभ हो चुकी है 

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