संतालों का पर्व त्यौहार
संतालों का पर्व-त्योंहार सामूहिक रूप से मनाये जाने की परम्परा हैं। पर्व-त्यौहार अवसर एवं माह पर निर्भर होते हैं। संताली लोकगीत या लोकनृत्य मौसम या माह के अनुसार बदलते हैं। नव त्यौहार का शुभराभ 'माग' पर्व से होता है। बारह माह के आधार पर महीनों या बोगा के अनुसार होता है। जैसे- माघ माह में माघ बोंगा, फागुन माह से बाहा बोंगा चैत में रोहनी, वैशाख में एरो, झेटे के मुचरी, आसाढ़ में आसाढिया, सान में काराम, भादर में जानताड़, दासाय सोहराय में सोहराय, धाड़ पूस में साकरात, ।
क्र. माह /बोंगापर्व / पाराब देवस्थल गीत नृत्य वाद्य दिन
1. माघ माघ बोंगा मैदान डाहार डाहार टामाक माघ मुलुकसे
लागड़े लागड़े दुमदाः
दोड़
2. फागुन बाहा बौंगा जाहेर बाहा बाहा '' "
फागुनमुलुः
3. चैत रोहनी दोसिमना पाता पाता '' कुनामी तक
सेंदरां
लगड़े
4. बायसाघ एरोः मैदान दोड. पाता " "
5. जेठ मुचरी मैदान " " " "
6. आषाड़ आसाड़िया जाहेर " " " आषाढ़ प्रथम
7. सावन काराम अखड़ा काराम काराम " सावन प्रथम
दोड.
8.भादोर जानताड़ खेतजाकाम सापड़ा पाता भुवाड. "
जाहेर पाता करताल
9. दाँसाय दाँसाय गुरुगृह दाँसाय दाँसाय भुवाड. दासाय दुर्गापूजा के
रंगडा तीन दिन आगे
तुमदाः टामाः एमान
10. सोहराय सोहराय गोटपुजा सोहराय सोहराय तुमदाः कालीपूजा
11. आंघाड़ सोहराय मैदान लगड़े डाण्टस " एमान
12. पूस सोहराय घर गाड़ी गाड़ी डाण्ठा पोससाकरात
साकरात आसेन आसेन
1. माघपर्व- माघ पर्व 'मागबोंगा' या जनवरी-फरवरी माह में सम्पन्न होता है। जब नयी पत्तियाँ पेड़ पौधों में आती हैं तब यह पर्व मनाया जाता है। जब तक माघे पर्व नहीं होता है। तब कोई भी संताल व्यक्ति नयी पत्ती व्यवहार नहीं करते है पहाड़ जंगल नहीं जाते है। संताल समाज प्रकृति पुजारी है। इसलिए प्रकृति पूजा करने के बाद ही नयी पत्तियाँ प्रयोग में लाते है।
2.बाहा पर्व - बाहा पर्व,फागुन माह या फरवरी-मार्च में गांव के जाहेर थान में मनाया जाता है। साल फूल सारजोम बाहा जब जंगल में खिल उठता है तब संताल बाहा पर्व मनाते है। इस माह में फूल बन, जंगल, नदी, मैदान सर्वत्र हरियाली छा जाती है इसलिए इसको बाहा पर्व कहते हैं। बाहा पर्व मनाने का मूल उद्देश्य उनका भाविष्य सुख समृद्धि के रूप में मनाया जाता है। बाहा पर्व तीन दिन मनाया जाता है। पहला दिन 'उम नाड़का दिन कहते हैं, इस दिन देवी देवताओं को नहलाया जाता है। दूसरे दिन 'बाहा सारदी कहते हैं एवं तीसरे दिन 'बाहा पर्व' की बिदाई एवं बाहा शिकार (बाहा सेंदरा) होता है। इसी प्रकार फागुन महीना में ही बाहा पर्व सम्पन्न हो जाता है।
3. एरो पर्व- यह पर्व चैत एवं वैशाख माह में मनाया जाता है। इस अवसर पर गाँव के जाहेर थान में देवी देवताओं के नाम से मुर्गी की बलि दी जाती है तथा भली भति बीज के उगने के लिए प्रार्थना की जाती है।
4. आसाड़िया पर्व- आषाढ़ माह में 'आसाड़िया पर्व' जाहेर में सम्पन्न होता है। जब धान की फसल में हरियाली आ जाती है तब यह पर्व मनाया जाता है। 'आषाड़ पर्व' जब तक सम्पन्न नहीं होता है तब तक कोई भी संताल अपने घर जंगली घास या चारेच नहीं काटते है, तथा नहीं लाते हैं।
5.काराम पर्व- (सावन) माह में सम्पन्न होता है। करम पेड़ देवता के रूप में पूजन होता है।
6. दासाय पर्व - दॉसाय पर्व दासाय माह अर्थात सितम्बर-अक्टूवर दुर्गापूजा के समय सम्पन्न होता है।
8. साकरात पर्व- यह पर्व वर्ष के अन्तिम माह पौष में सम्पन्न होता है। यह पर्व दो दिन होता है। पहला दिन हाकू काटकोम दिन कहते है इस दिन गांव के इर्द-गिर्द मछलियों केकड़ों, पशु-पक्षियों का शिकार कियाजाता है। दूसरे दिन 'साकरात बुढ़ी' की पूजा होती हैं एक मुर्गी की बलि, घर के चौखट पर बलि चढ़ाते हैं, तथा परिवार की कुशलता के लिए उनसे प्रार्थना की जाती है।
इस तरह संताल आदिम जाति के पर्व प्रकृति, कृषि तथा आलौकिक शक्तियों से सम्बन्धित हैं। यही कारण है कि संतालों के पर्व का समय कृषि पेड़ पौधे तथा आवश्यकताओं के अनुसार सुनिश्चत होता है










